आज के युवाओ की सोच…

(लेखक दीपक)

                                     इतिहास से लेकर आने वाले भविष्य तक किसी भी देश या किसी भी संस्कृति की एहम जरूरत है युवा पीड़ी| युवाओ के दम पर ही एक देश अपना विकास कर सकता है या फिर अपना नाश कर सकता है| वही लोगो को बाट के बिना मुकदमे मार डालने का तरीका नया नहीं बहुत पुराना है, ये तरीका उस समय से उपयोग में लाया जा रहा है जब से मानव जाति का जन्म हुआ| लोग जंगलो में रहते थे तब कोई जाति धर्म नही था तब सभी मनुष्य थे और ढेरे ढेरे विकास की और बाद रहे थे| इसके बाद लोगो मे मानसिक विकास होने लगा लोग अपनी पहचान बनाने के लिए वर्ग,जाति में एक दूसरे को बाटने लगे| ये लोग इस वर्ग (जाति) के है, उस वर्ग के है कहकर भेदभाव की शुरुआत सी होगयी | लोगो को अपनी जाति के अनुसार रहने, खाने, बोलने और जीवन जीने का तौर तरीको को सीखना पड़ा और उन्हे समय- समय पर उन्हे दूसरों द्वारा इस बात से अवगत करवाया गया| उस समय जाति के नाम पर के बिना मुकदमे मार डालने का तरीका अपनाया जाने लगा और यह तब तक चला जब तक ईसाई और मुश्लिम भारत मे नही आये थे, इसको खत्म करने के लिए बहुत से महापुरुषों ने संघर्ष किया बहुत बड़ा परिवर्तन लाया गया, लेकीन आज भी लोग उस नकारात्मक सोच से बाहर नही आ पाये है|

बात यहा ख़त्म नहीं होती है, इसके बाद जाति से हटकर एक और सभ्यता यानि धर्म जब भारत मे आया तब जातिवाद के साथ धर्मवाद का जन्म हुआ और धर्म के नाम पर एक और बिना मुकदमे मार डालने का तरीका मिल गया और जाति के नाम पर तब तक बिना मुकदमे मार डालने का तरीके अपना सकते हो जबतक आप का प्रतिद्वंदी आप के समाज का हो,लेकिन जब सभ्यता बदल जाती है तब लोगो ने दूसरे समाज को धर्म का नाम दे के लोगो को जाति से हटाकर धर्म में बाटने का काम शुरू किया और लोगो को धर्म के नाम पे बिना मुकदमे मार डालने को धार्मिक भावनाओं से जोड़ दिया , और ये लोग उस समय भी सफल हुए और आज भी सफल हो रहे है , धर्म जाति के नाम पर बिना मुकदमे मार डालने वाले कभी कुछ हासिल नही कर पाए और जो लोग बिना मुकदमे मार डालने गए वो सदा राज करते है ,मेरा मानना है कि लोग माँ के गर्भ से बाहर आ के ही जाती धर्म और अन्य का हिस्सा बनता है, इससे पहले कोई भी किसी समुदाय का है ऐसा कोई विशेष चिन्ह नही है लेकिन जन्म के 1 सेकंड बाद वो एक विशेष बंधन से बध जाता है, और वह उसी का हिस्सा बन जाता है इससे पहले कोई किसी ना किसी धर्म या जाति का होता है|जब लोगो को विदेश का पता नही था तब तक बस जाति में लोगो को बाटा गया था आप वेद, क़ुरान, बाइबिल या किसी अन्य धर्म के ग्रंथ में ऐसा नही लिखा है कि दूसरे धर्म भी है इससे ऐसा लगता है कि लोग अपना राजकाज कायम रखने के लिए लोगो को वर्गो में बाटने के लिए बिना मुकदमे मार डालने का काम शुरू किया, अब भी हम सब शिक्षित होने के बाद भी इन सभी बंधनो से बाहर नही आ पाते, मेरा इस लेख को लिखने का मतलब ये नही है कि मैं किसी धर्म को नही मानता मैं भी आप सभी मे से एक था लेकिन मैं तार्किक मनन किया और तथ्य को जानने की कोशिश की तो पता चला कि समय के अनुसार लोगो को धर्म और जाति में वर्गीकृत किया, पहले मैं आप को अखंड भारत की बात करता हु यहाँ की जैसे जैसे लोग आए अपने अपने धर्मो को ले के आये और अपना वर्चस्व बनाने के लिये लोगो की भावनाओ और मानसिकताओं को अलग बता के लोगो को बाटने का अपना काम और भी तेजी से जारी रखा, ये वर्गीकरण तब से चल रहा है|

जब से आपके अपने धर्म का आरम्भ हुआ तब से आप कभी मनन करो अकेले में बैठ के की जब का आरंभ हो रहा था तब दूसरी सभ्यता का जिक्र क्यों नही है? और जब इंसान एक जैसा है तो किस आधार पर वर्गीकृत किया गया ? जो लोग उस समय अशिक्षित थे उन्हें जाति में विभाजित किया गया और उन्हें वही सिखाया जाता था जिस काम के लिए वर्गीकृत किया गया था चाहे ये काम उस जाति के घर का मुखिया ही क्यों न हो लेकिन अब समय बदल चुका है अब लोग बदल चुके है लेकिन कुछ लोग है कि अपनी उस मनोधारणा को छोड़ने को तैयार नही है और वही लोग बिना मुकदमे मार डाला करते थे और करने वालो को बढ़ावा देते है , लेकिन ये मनोधारणा उन्ही में बची है जो या तो एक मानक इकाई के नीचे है, आप अगर अपने समाज मे उन लोगो को जानने की कोशिश करो जो लोग आप के धर्म और जाति के ठेकेदार बने हुए है वो इन सब को नही मानते वो तो अपना राज या सत्ता कायम रखने के लिए समाज मे गलतधारण और मानशिक भावनाओ को समाज मे लाने का काम करते है जिससे बिना मुकदमे मार डालने को बढावा मिलता है, और इस प्रकार के घटनाओ में ज्यादातर युवाओ को लाया जाता है और वही शिकार सबसे ज्यादा युवा ही होते है इसलिए मेरा मानना है कि युवाओ को अन्धविस्वाश में न आ के लोगो तथ्य जो खंगालना चाहिए और उसे बिना जाने समझे किसी निर्णय तक नही पहुचना चाहिये, क्योंकि युवा ही देश के भविष्य है युवा चाहे तो बिना मुकदमे मार डालने की इस दुनिया से समाप्त किया जा सकता है। और युवा अवस्था मे किसी भी मनन किये बिना निर्णय जाता है जो कभी कभी बहुत ही हानिकारक निर्णय होता है इसलिए समाज मे कोई परवर्तन लाना है तो युवाओ की भागीदारी अहम है उससे सभी को जोड़ने का काम शुरू किया, आप किसी भी धर्म के बारे में पढ़ोगे तो आप को वहां केवल उसी धर्म के बारे में बताया जाता है तो हैम कैसे ये निर्णय ले लेते है कि सारे धर्म के लोग हमारे विरोधी हैं|ऐसा तो कही बताया और सिखाया नही जाता है तो आखिर में ये कौन से लोग है जो ऐसी भावनाओ को विकसित करते है? ये वही लोग है जो उस समय जब धर्म का निर्माण कर रहे थे और तब भी लोगो को बांटने का काम किया आज भी उन्ही के पद चिन्हों पे चल के मानवता का दुश्मन बन हुए है , हमे उन्हें एक अच्छी विचारधारा प्रदान करने का काम करना है, इस मिशन को पूरा करने के लिए आप सभी नवयुवको की भागीदारी जरूरी है। हमे उन लोगो की संकुचित मानशिकता को सुधारने का काम करना है जो लोग बिना मुकदमे मार डालने का कार्य करते है । अब भारत के नवजवानों को बोलने की जरूरत है कि हम अब धर्म जाति के नाम पर होने वाली बिना मुकदमे के मार डालने की परंपरा को बन्द करना है।

 

जय हिन्द! जय भारत!

 

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