“लाशो पर राजनीति”

इस लेख के माध्यम से मैं भारत में लाशो पर राजनीति करने वालो की विचार धारा से आप को अवगत कराना चाहता हुं। मेरे मन मे एक छोटी सी जिज्ञासा थी लोगो को समझने की ये कैसा देश बन गया है जो कि लाशो पे राजनीति करने का एक फैशन बन गया है, एक आतंकी की लाश को ले के राजनीति होती है एक भीड़ इकट्ठा होती है उसके जनाजे में, तो दूसरे समुदाय के लोग सलाह देते है भारत छोड़ के पाकिस्तान चले जाओ, वो कौन लोग है जो आतंकी के जनाजे में आ जाते हैं। जितनी भीड़ आतंकी और गैंगेस्टर के जनाजे में आती है उतनी ही भीड़ एक उतनी ही सहानुभूति के साथ आम इंसान के जनाजे में आती तो देश का नजारा कुछ और होता देश में भाई चारे बढ़ते। और लोग आपस मे मिल जुल के रहते लेकिन मै यह देख रहा हुं कि आम इंसान की मौत में चार लोग बड़ी मुशिकल से जुटते है और इन आतंकी और गैंगेस्टर की मौत का मातम मनाने पूरा जनसैलाब उमड़ पड़ता है

आखिर लोगो मे ये कैसी भावना आ गयी है? और ये भावना आती है कैसे? कौन घोल रहा है ये नफरत का जहर ? ये हम सब को सोचने पर मजबूर करती है कि देश कहा जा रहा है और जब एक गैंगेस्टर के लाश के साथ 20 दिन लोग राजनीति करते है देश को सुलगाने की कोशिश करते है और प्रशाशन में लड़ते है जो उन्ही का दूसरा भाई है लेकिन ये लोग इतना ज्यादा जातिगत भावना से ग्रसित हो चुके है कि उन्हें अपने ही नही दिखते जिन्हें वो आज मार रहे है उन्हें कल तक बड़े प्यार से मिलते थे लेकिन ऐसा कैसे हो जाता है, ये देख के ऐसा लगता है कि आप जब पाकिस्तान जाने की बाते करते थे तब आप देशभक्त थे और अब अपने ही लोगो को मार रहे है तो उनको कोई सलाह नही दी जाती है कि पाकिस्तान चले जाओ इसका पता नही चलता क्योंकि शायद दूसरा समुदाय इन सब मामलो में बोल न रहा हो या उनकी आवाज दबा दी गयी हो ।

ऐसा क्यों हो रहा है कि लोग शिक्षित होने के वावजूद भी धार्मिक, जातिगत भावनाओ में उलझ के एक दूसरे के दुश्मन बन के बैठे है, एक आतंकी और गैंगेस्टर में क्या फर्क होता है मुझे नही मालूम मुझे तो बस इतना पता है कि दोनों मासूमो की मौत का खेल खेलते है फिर ये कौन लोग हैं जो उनके बहाने अपनी राजनीति की रोटी सेक रहे है या अपने राजनीति में बने रहने या आने के लिए ऐसा कर रहे है कौन लोग है जो जैसा कर रहे है या उनसे कराया जा रहा है ये एक बहुत ही चिंता का विषय है हमे सोचने को मजबूर करता है कि हम धार्मिक, जातिगत भावनाओ के भावावेश में आ के क्या कर रहे है करते है हम आप और सब कुछ खोते भी है फिर उन चंद लोगों के इशारे से ये देश कैसे उबल जाता है ?

आप अगर ये मेरा लेख पड़ रहे है तो एक बार शांति मन से सब विचार धारा से दूर हट के सोचो कि हम क्या कर रहे है ? और क्यों कर रहै है ? किसके लिए कर रहे है ? किसका लाभ हो रहा है? तो हमे केवल एक उत्तर मिलता है जो ये है कि हमे इंसानियत का वो रूप मिला जो आप अकेले में भी अपने किये हुए कर्मो को आप खुद को माफ नही कर पाओगे अगर आप निष्पक्ष हो के सोचोगे इसलिए हमें इन सब से आगे बढ़ के भाई चारे के लिए लड़ना चाहिए , भाई चारे के लिए जनाजे या अर्थी को कंधा देना चाहिए जिससे भाई चारे का सौहार्द बड़े।

अगर उस पर चिंतन करोगे ये कैसा देश है ये कैसी राजनीति है तो आप को जरूर समझ आएगा और आप उस पर जरूर सोचेंगे। और हमे ही ये खत्म करना है कि गैंगेस्टर हो या आतंकी हमारे लिए दोनों एक जैसे है हमें इन पर राजनीति करने वालो का साथ नही देना है अपने देश को इन सब गंदे लोग और गंदी मानशिकता से बचाना है तो आप को सोचना पड़ेगा।

 

( दीपक पाण्ड़े )

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