rahat indori birthday special

“किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है” कहने वाले शायर का आज है जन्मदिन

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है 
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है 

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में 
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है 

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन 
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है 

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है 
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है 

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है 

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में 
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है

राहत इंदौरी साल के पहले दिन पैदा हुए थे। राहत का जन्म 1 जनवरी 1950 में हुआ था। नए साल में हम काव्य चर्चा के अलावा राहत इंदौरी साहब के कुछ ऐसे 10 बड़े शेर पेश कर रहे हैं जिन्होंने राहत इंदौरी को सबसे अलग बनाया। राहत इंदौरी के शेर हर लफ्ज के साथ मोहब्बत की एक नई और अलग शुरुआत करते हैं। राहत मोहब्बत को हर एक आदमी का सबसे अहम हक मानते हैं। लिहाजा उनके शेर काफी वजनदार होते हैं।

आज के समय में अगर किसी ऐसे शायर की बात की जाए जो एक आम हिंदुस्तानी को गहरी से गहरी बात भी बहुत आसान लफ्जों में समझाने का माद्दा रखता है तो लबों पर एक ही नाम आता है राहत इंदौरी साहब का। तेवर जितने कड़े, भाषा उतनी ही आसान, बात जितनी गंभीर, उसको बयां करने का अंदाज उतना ही खास, लेकिन ऐसा अंदाज जिसे ऐसे लोग भी आसानी से समझ सकते हैं जो शायरी की कम समझ रखते हो कुछ ऐसी ही काबिलियत के मालिक हैं राहत इंदौरी।

जीवन की शायद ही ऐसी कोई भावना हो जो राहत साहब की शायरी में देखने को न मिलती हो। अपनी बात को वह जिस तरह से लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं वह ठीक वैसे ही उनके सुनने वालों के जेहन में समा जाती है। यह उनकी तीखी लेकिन सरल शायरी का ही कमाल है जो उन्हें हर मुशायरे की जान बना कर लोगों के सामने पेश कर देता है। हिंदुस्तान हो या पाकिस्तान, दुबई हो या अमेरिका हर जगह राहत का बिना डरे अपनी बात को सामने रखना, उन्हें सबसे खास बनाता है।

“मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे, मेरे भाई, मेरे हिस्से की जमीं तू रख ले… कभी दिमाग, कभी दिल, कभी नजर में रहो, ये सब तुम्हारे घर हैं, किसी भी घर में रहो”

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *