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दलितों के घर तोड़कर एयरपोर्ट बनाना कितना सही?

एक तरफ तो हमारी सरकार गरीबों के लिए नई नई योजना बनाकर उन्हें घर और मुआवज़ा देने की बात करती है वहीं दूसरी तरफ अपनी नीतियों के निर्माण के लिए उन्हें दिए हुए घर एक पल में छीन लेती है। ये बात है झारखंण सरकार की जिसने AAI और DRDO के साथ मिलकर एक सौदा किया है जिसके तहत देवघर एयरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाया जाना है। जिसके लिए गांव के 133 घरों को बुल्डोजर से तोड़ दिया गया।
अब हालात ये हैं कि 133 घरों में रहने वाले गरीब परिवार के लोग अपने टूटे हुए घरों के मलबे पर टीन डालकर अपनी जिंदगी गुज़ार रहें हैं। वहां के लोगों ने बताया जब हमारे घर तोड़े गए तब हाताल इतने बदतर थे कि कई औरतों को खुले में ही प्रसव पीड़ा से गुज़रना पड़ा। साथ ही ठिठुरती ठंड में खुले में रह रहे है जिस वजह से 3 लोगों की जान भी चली गई । और उनके परिवार वालों को उम्मीद है कि सरकार उन्हें मुआवजा देगी।
अब सवाल है कि सरकार इन गरीबों के लिए क्या कदम उठाएगी? जो लोग मुआवज़े की आस लगा कर बैठे है क्या उन्हें मुआवज़ा मिल पाएगा? या फिर से एक बार सरकार सिर्फ अपना ही फायदा देखते हुए काम करेगी?

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