शहादत पर भी धार्मिक मतभेद?

आज हर चीज को धर्म में तोला जाता है, चाहे वो आम इंसान हो या फिर एक शहीद। लोगों ने इंसानों को ही नहीं बल्की योगा से लेकर भगवा या तिरंगा तक हर चीज को हिंदू मुस्लिम बना दिया है।

जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर में आतंकियों से बदला लेते हुए शहीद हुए बिहार के भोजपुर जिले के जांबाज सपूत मुजाहिद खान को बुधवार लोगों ने नम आखों से अंतिम विदाई दी। उनके पार्थिव शरीर को पीरो के एक कब्रिस्तान में राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। साथ ही शहीद के परिजनों ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए पांच लाख रुपये का चेक लेने से भी साफ तौर पर इनकार कर दिया। देश की खातिर अपने प्राण न्योछावर करने वाले मुजाहिद खान के जनाजे में जनसैलाब उमड़ पड़ा था। शहीद जवान को अंतिम विदाई देने के लिए उनके गांव के अलावा आसपास के गांवों से हजारों लोग पीरो पहुंचे, लेकिन केंद्र या राज्य सरकार का कोई भी मंत्री नहीं पहुंचा। हां, राज्य सरकार ने पांच लाख रुपये का चेक जरूर भिजवा दिया। शहीद के परिजनों का कहना है कि सरकार में शामिल लोगों में कोई संवेदना नहीं है, उनके लिए सिर्फ नोट और वोट की अहमियत है। परिवार का कहना यह भी है कि उनका बेटा दारू पीकर नहीं मरा देश के लिए शहीद हुआ है जब बाकियों को 11 लाख का मुआवजा दिया जाता है तो उन्हें सिर्फ 5 लाख ही क्यों?

तो साहिब अगर आप सोच रहे होंगे की शहीद परिवार को आप अपने कुछ पैसों से तोलेंगे तो आपको हम बता दें कि आप कुछ पैसों में शहिदों की शहादत को नहीं तोल सकते। आखिर कब तक अपने वोट के लिए जनता से लाखों झूठ बोलते रहेंगे और शहादत को अपमानित करते रहेंगे। आपके कुछ पैसों से किसी की जान वापस नहीं आएगी। लेकिन क्या वजह है कि अंधी और बहरी सरकार के कुछ लोग एक बार भी शहीद को अंतिम विदाई देने नहीं पहुंचे कुछ और लोगों का कहना है कि सिर्फ शहीद का धर्म अलग होने की वजह से सरकार से कोई भी शहीद के अंतिम संसकार में नहीं पहुंचे।

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