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 महिला दिवस मनाइए लेकिन बाबा साहब के योगदान को भी याद रखिए

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है और सभी महिलाओं के लिए ये दिन बड़ा है। लेकिन महिलाओं को ये आजादी इतनी आसानी से नहीं मिली। महिलाओं की इस आजादी में भीमराव अम्बेडकर का अहम योगदान है। आपको यह जानकर हैरानी होगी जब भारत आजाद हुआ तब हिंदू समाज में पुरुष और महिलाओं को तलाक का अधिकार नहीं था। पुरूषों को एक से ज्यादा शादी करने की आजादी थी लेकिन विधवाएं दोबारा शादी नहीं कर सकती थी। विधवाओं को संपत्ति से भी वंचित रखा गया था और तब 11 अप्रैल 1947 को डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने हिंदू कोड बिल पेश किया था। ये बिल मृतक की विधवा, पुत्री और पुत्र को उसकी संपत्ति में बराबर का अधिकार देता था। इसके अतिरिक्त, पुत्रियों को उनके पिता की संपत्ति में अपने भाईयों से आधा हिस्सा प्राप्त होता।

इस विधेयक में विवाह संबंधी प्रावधानों में बदलाव किया गया था। इसमें हिंदू पुरूषों द्वारा एक से अधिक महिलाओं से शादी करने पर प्रतिबंध और अलगाव संबंधी प्रावधान भी थे। यह कहा जा सकता है कि हिंदू महिलाओं को तलाक का अधिकार दिया जा रहा था।

यह बिल ऐसी तमाम कुरीतियों को हिंदू धर्म से दूर कर रहा था जिन्हें परंपरा के नाम पर कुछ कट्टरपंथी जिंदा रखना चाहते थे। इसका जोरदार विरोध हुआ। अम्बेडकर के तमाम तर्क और नेहरू का समर्थन भी बेअसर साबित हो रहा था।

हिंदू कोड बिल का विरोध करने वालों का कहना था कि सिर्फ हिंदुओं के लिए कानून क्यों लाया जा रहा है, बहुविवाह की परंपरा तो दूसरे धर्मों में भी है। इस कानून को सभी पर लागू किया जाना चाहिए। बाबा साहब ने और भी बहुत कोशिशें की महिलाओं को समाज में बराबरी का हक देने की। जो आज महिलादिवस के मौके पर याद की जा सकती हैं।

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