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गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने दिया इस्तीफा, कौन होगा नया सीएम

गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ कल इस्तीफा दे दिया है। बुधवार को ओ पी कोहली ने विधानसभा भंग करते हुए नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त कर दिया था।

इसके साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि गुजरात के हाल ही में बने नए बीजेपी विधायक आज राज्य का अगला मुख्यमंत्री चुनने के लिए गांधीनगर में अहम बैठक करने वाले है। आपको बता दें कि गुरुवार को उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल और बाकी सभी मंत्रियों के साथ विजय रूपाणी गांधीनगर में राजभवन गए थे और वहां जाकर उन्होंने राज्यपाल को अपने इस्तीफे पत्र सौंप दिए।

फिलहाल जब तक किसी नई सरकार का गठन नहीं हो जाता तब तक विजय रूपाणी ही कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। पटेल ने राजभवन के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए बताया था कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उनके पूरे मंत्रिमंडल ने राज्यपाल ओ पी कोहली को अपने इस्तीफे दिए जिसे राज्यपाल ओ पी कोहली द्वारा स्वीकार भी कर लिया गया हैं।

उन्होंने आगे बताया है कि, सत्तारुढ़ दल के नए नेता का चयन करने के लिए सभी पार्टी विधायक पर्यवेक्षकों और प्रभारी नेताओं के साथ एक अहम बैठक करेंगे। यहां तक की सभी विधायकों को भी इस बैठक में मौजूद रहने के लिए सूचना भी दे दी गई है।

इसके साथ ही आपको बता दें कि मुख्यमंत्री पद के लिए रूपाणी के अलावा जिन लोगों का नाम सबसे आगे चल रहा है उनमें नितिन पटेल और गुजरात से राज्यसभा सदस्य मनसुख मंडाविया शामिल हैं। मंडाविया पाटीदार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

राज्यपाल ओ पी कोहली ने चुनाव नतीजे के बाद गुरुवार को विधानसभा भंग कर दी थी। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 182 सदस्यीय विधानसभा में 99 सीटें हासिल कर सत्ता बरकरार रखी है।

लेकिन अब इसमें यह बात देखना अब भी बाकी है कि क्या रूपाणी की घटती लोकप्रियता को देखकर बीजेपी रूपाणी पर दोबारा दाव लगाने का साहस कर पाएगी। क्योकि जब रूपाणी को सीएम बनाया गया था तब सीटें 115 हुआ करती थी लेकिन अब यह घटकर 99 तक पहुंच चुकी है।

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कौन होगा हिमाचल प्रदेश का नया सीएम?

हाल ही में हिमाचल प्रदेश के चुनाव खत्म हुए है और 18 दिसंबर को चुनाव के परिणाम भी सबके सामने आ चुके है। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की सरकार ने अपने पांव जमा लिए है। अब चर्चा का विष्य यह बना हुआ है कि हिमाचल प्रदेश में सीएम बनना किसके लिए सबसे आसान होगा। और इस रेस में जयराम ठाकुर का सीएम बनना लगभग तय लग रहा है।

आपको बता दें कि सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अभी इसकी आधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं की गई हैं, लेकिन आज वीरवार को शिमला में होने वाली बीजेपी विधायक और कोर कमेटी की बैठक के बाद उनके सीएम बनने की घोषणा किए जाने की संभावना लगभग तय ही नजर आ रही है। इतना ही नहीं जयराम ठाकुर मंडी 5वीं बार मंडी जिला के सिराज विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। वह बीजेपी सरकार में मंत्री और प्रदेश में बीजेपी अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सीएम पद के लिए फिलहाल जयराम ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है।

इसके साथ ही यह भी खबरें आ रही हैं कि प्रेम कुमार धूमल को बीजेपी पहले ही अपना सीएम उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी। लेकिन धूमल के हार जाने के बाद उनके सीएम पद की दावेदारी पूरी तरह से खत्म हो गई है और अब हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर का नाम सीएम बनने के लिए सबसे आगे आ गया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और आरएसएस प्रचारक अजय जमवाल भी इस दौड़ में शामिल नजर आ रहे हैं।

आपको बता दें कि जयराम ठाकुर जाति से राजपूत हैं। शायद एक वजह यह भी है कि उनके नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है, क्योंकि प्रदेश में राजपूतों की संख्या भी काफी ज्यादा है। इसी बीच BJP के प्रदेश प्रभारी मंगल पांडे ने बयान दिया है कि सीएम पद पर सहमति बनाने के लिए सभी सीनियर नेताओं से भी एक मीटिंग बुलाकर बात कर दी जाएगी। उन्होंने कहा हैं कि निर्मला सीतारामन और नरेंद्र तोमर भी दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं और अगले 1-2 दिन में प्रदेश को एक नया सीएम निश्चित ही मिल जाएगा।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में नए मुख्यमंत्री की तलाश के लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और नरेंद्र सिंह तोमर को पर्यवेक्षक बनाया गया है। आपको बता दें कि सीएम के नाम पर आखिरी मुहर बीजेपी संसदीय बोर्ड को ही लगानी है। इतना ही नहीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा की 68 सीटों में से बीजेपी को सिर्फ 44 सीटें ही मिली हैं। जबकि कांग्रेस सिर्फ 21 सीटों पर ही सिमट गई। बाकी की बची हुई तीन सीटें अन्य के खाते में चली गई हैं। हिमाचल में बीजेपी को कम से कम 48.6 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस सिर्फ 41.9 फीसदी वोट ही हासिल कर पाई है।

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विपक्ष के हंगामे के चलते नहीं हो पाई सचिन की मेडन स्पीच

आज दोपहर करीब 2 बजे जब राज्य सभा की कार्यवाही शुरू की गई थी तो क्रिकेट जगत के लेजेंड सचिन तेंदुलकर को आज मौजूद सभी लोगों के सामने अपना पहला भाषण देना था। यहां तक की सचिन इसके लिए पूरी तैयारी के साथ भी आए थे और उन्होंने अपना पूरा भाषण एक कागज पर लिखकर रखा हुआ था।

आपको बता दें कि खेल के भविष्य और खेलने के अधिकारों को लेकर आज दोपहर को कुछ समय की चर्चा तय कर दी गई थी, जिसमें सिर्फ सचिन को ही नहीं बल्कि सचिन के साथ पीएल पुनिया को भी अपनी कुछ खास बाते सबके सामने पेश करनी थी।

लेकिन, सदन के शुरू होते ही कांग्रेस के नारेबाजी करने की वजह से सचिन 15 मिनट तक वहां पर खड़े ही रहे। कांग्रेस उस समय 2G और प्रधानमंत्री माफी मांगो के नारों के बीच अपने हंगामे में ही पूरी तरह से मशरूफ थी। इतना ही नहीं सभापति ने उनसे अपील भी की थी कि वह देश के भारत रत्न को भी बोलने का मौका दें। फिर उन्होंने परेशान होकर कहा कि पूरा देश आप सभी लोगों की यह तस्वीर देख रहा है।

आपको बता दें कि 15 मिनट के बाद राज्यसभा को वहीं पर स्थगित कर दिया गया और सचिन अपना भाषण पूरा तो छोड़ो शुरू भी नहीं कर पाए। सभा के स्थगन होने के तुरंत बाद सभी सांसद सचिन को घेर कर खड़े हो गए, जिसमें जया बच्चन भी शामिल थीं। गौरतलब है कि जया बच्चन भी इस बड़े हंगामे के बीच में बार-बार कांग्रेस से अनुरोध कर रही थीं कि वह पहले सचिन को बोलने का मौका दें।

इस पूरे हंगामे के दौरान सचिन की पत्नी अंजलि विजिटर्स गैलरी में बैठे कर सदन में चल रही पूरी कार्यवाही को ध्यान से देख रही थीं। अब जया बच्चन का कहना है कि अगर इसी तरह सब कुछ चलता रहा तो कोई भी नॉमिनेटेड सदस्य बोलने का साहस ही नहीं करेगा, ना ही उसको कभी कुछ भी बोलने की इच्छा होगी और वह कांग्रेस के रवैये से बेहद हताश भी नजर आ रही हैं।

जया बच्चन का कहना है कि कांग्रेस ने सचिन तेंदुलकर को बोलने का एक भी मौका नहीं दिया और यहां तक की कांग्रेस ने भारत रत्न देखकर भी उनका सम्मान नहीं रखा। क्या इस राज्यसभा में सिर्फ सियासतदानों के भाषण होंगे। क्या सिर्फ उन्हीं को बोलने का मौका दिया जाएगा जो चिल्ला सकते हैं। कोई भी साधारण आदमी एक्सपर्ट खिलाड़ी कभी नहीं बोल सकता।
जया बच्चन ने मीडिया खबरों से बातचीत करते हुए कहा कि मैं कांग्रेस की इस हरकत से काफी निराश हूं। मैं वैसे नहीं बोलती हूं, जब तक मैं बहुत निराश ना हो जाऊं। मैंने कई बार समझाने की कोशिश भी की कि उनकी मेडन स्पीच है, उनको बोलने दीजिए। सचिन खेल के इतिहास का एक ऐसा बड़ा नाम है और उन्होंने देश का नाम विश्व में हमेशा ही रोशन किया है। जया ने आगे कहा कि सचिन ने पूरी दुनिया में देश का नाम काफी उंचे स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। अगर उनके साथ ही ऐसा बर्ताव किया जाएगा, तो आप लोग यह सोच भी कैसे सकते हैं कि लोग आकर राजसभा में बैठेंगे। सचिन आज कांग्रेस के इस बर्ताव से काफी निराश थे। वह अपनी जिंदगी में काफी व्यस्त रहते हैं और ऐसे में उनके पास और भी कई काम हैं, फिर भी वह बहुत देर तक वहीं पर खड़े रहे।
जया ने गुस्से में आगे कहा हैं कि फिर कहा जाता है कि सचिन संसद नहीं आते। मैं कहती हूं अच्छा हुआ नहीं आते हैं, इस तरह से बर्ताव करना है अगर उनके साथ, तो उनके आने का ही क्या फायदा वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। साधारण व्यक्ति होते तो सोचते। आपने उनको नॉमिनेट किया, आप लोगों ने ही उन्हें भारत रत्न दिया और आप उनको बोलने का मौका नहीं दे रहे हैं। 5 मिनट रुक जाते तो क्या हो जाता।
अब अगर देखा जाए तो कांग्रेस ऐसी ही बच्चों वाली हरकते करने की वजह से कभी सत्ता में नहीं आ सकती। और हमारे देश को शायद ऐसा नेता तो बिलकुल भी नहीं चाहिए जो किसी क4ा सम्मान करने भी न जानता हो। कांग्रेस के लिए किसी के बोलने से ज्यादा जरूरी अपनी रीजनीति हो चली है ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री बनाना सबसे बड़ी बेवकूफी होगी।
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मिसाइल टेस्ट में देरी होने के कारण तानाशाह ने 2 अफसरों को उतारा मौत के घाट

तानाशाह एक ऐसा नाम जो आज काफी ज्यादा चर्चित है और हर बार तानाशाह से जुड़ी हर खबर में कुछ न कुछ मसाला मिलता ही है। हाल ही में तानाशाह से जुड़ी एक और खबर काफी सुर्खियां बिटोरती हुई नजर आ रही हैं।

आपको बता दें कि उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन की परमाणु और मिसाइल परीक्षण की सनक लगातार काफी ज्यादा बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही ऐसा नजर आ रहा है कि उसको इसमें जरा सी भी देरी बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं है। हाल ही में मिसाइल परीक्षण में देरी होने की वजह से तानाशाह किम ने अपने दो अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया है। इसमें से एक अधिकारी ने न्यूक्लियर बेस पर हुए हादसे की जिम्मेदारी ली थी।

इतना ही नहीं इसके बाद मिसाइल परीक्षण कुछ दिन के लिए टाल दिया गया था, जिसके चलते तानाशाह काफी ज्यादा भड़का हुआ था। देरी होने के बाद यह मिसाइल परीक्षण तीन सितंबर को किया गया था। न्‍यूक्लियर बेस को चलाने और इमारत की देखरेख करने की जिम्मेदारी इसी अधिकारी के हाथों में दे दी गई थी, जिसका नाम पर्क इन-यंग बताया जा रहा है।

आपको बता दें कि पर्क इन-यंग उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ पार्टी की सेंट्रल कमेटी के डिविजन यानी ब्यूरो 131 के प्रमुख थे। इस कमेटी पर उत्तर कोरिया के सैन्य संस्थानों, न्यूक्लियर साइट और सैटेलाइट लांचिंग स्टेशन की निगरानी करने की जिम्मेदारी रहती है। इससे पांच दिन पहले तानाशाह ने जनरल ह्वांग प्योंग-सो को भी मौत के घाट उतार दिया था। ऐसे में इस तानाशाह को दरिंदा कहना शायद बिलकुल भी गलत नहीं होगा।

इसके साथ ही बताया जा रहा है कि वह उत्तर कोरिया में तानाशाह किम जोंग-उन के बाद दूसरे सबसे शक्तिशाली शख्स थे। ह्वांग प्योंग-सो उत्तर कोरिया की सेना में वाइस मार्शल की भूमिका निभाया करते थे। वह पिछले कुछ दिनों से अचानक लापता हो गए था और उसके बात खबरों में बताया जा रहा हैं कि किम जोंग-उन ने उनको मरवा दिया है।

आपको यह भी बता दें कि तानाशाह किम जोंग-उन पिछले पांच साल में सत्ता के लिए 340 लोगों को मरवा चुका है और इन मृत लोगों की गिनती में ज्यादातर सीनियर अधिकारी शामिल हैं।

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प्रद्युम्न हत्याकांड : जानें आखिर क्यों आरोपी छात्र को माना जा रहा है बालिग?

प्रद्युम्न हत्याकांड में रोज नए मोड़ आ रहे हैं। इस मामले में पहले पुलिस ने कंडक्टर अशोक को दोषी करार दिया था तो वहीं सीबीआई ने 11वीं के एक छात्र को दोषी ठहराया है। अब यह खबर आ रही है कि प्रद्युम्न मर्डर केस में आरोपी छात्र पर बालिग की तरह ही केस चलाया जाएगा। उस छात्र को पूरी तरह से बालिग मान कर ही मामले में सजा सुनाई जाएगी।

आपको बता दें कि जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड के इस फैसले के पीछे आरोपी छात्र की सामाजिक व मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट ने काफी अहम भूमिका निभाई है। सामाजिक रिपोर्ट में यह बात सामने आ गई है कि हत्या करने वाल आरोपी छात्र काफी आक्रामक है। वहीं, मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने स्टूडेंट से बातचीत करने के बाद उसकी मनोस्थिति के बारे में बताया था कि अलग-अलग परिस्थितियों में वह किस प्रकार का व्यवहार करता है।

आरोपी छात्र की दोनों रिपोर्ट्स कम से कम एक महीने पहले ही बोर्ड के पास पहुंच गई थीं, तब से ये सीलबंद थीं। 15 दिसंबर को सुनवाई करते समय दोनों रिपोर्ट्स को सभी पक्षों की मौजूदगी में खोला गया था। इसके बाद बोर्ड के सामने दोनों पक्षों के बीच रिपोर्ट्स पर कई देर तक बहस चली थी। प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर के वकील सुशील टेकरीवाल का कहना है कि आरोपी छात्र की सामाजिक रिपोर्ट बनाने के लिए जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपनी तरफ से एक कमिटी अलग से गठित की गई थी।
आपको बता दें कि इस कमिटी के सदस्यों और विशेषज्ञों ने छात्र के साथ पढ़ने वाले कई दूसरे बच्चों से, उसके पड़ोस में रहने वाले कई लोगों से बातचीत करने के बाद उनके द्वारा दिए गए सभी बयान दर्ज किए थे। इसके साथ ही उस विशेष कमिटी ने आरोपी छात्र को पहले पढ़ा चुके और अभी पढ़ा रहे टीचरों से भी बातचीत की थी। सभी से बातचीत के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया था। इसमें रिपोर्ट में बताया गया है कि स्टूडेंट का व्यवहार कुछ अग्रेसिव है, लेकिन उसका आईक्यू लेवल बाकी सभी छात्रों की तरह ही है।
टीचरों ने किए कई खुलासे

छात्र की सामाजिक रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि दो टीचरों से पूछताछ करने के बाद यह बात सामने आी है कि आरोपी चात्र काफी अग्रेसिव है। वह पहेल भी कई बार स्कूल में लड़ाई-झगड़ा करते हुए पाया गया है। एक टीचर का कहना है कि आरोपी छात्र एक बार स्कूल में नशे की हालत में भी पाया जा चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपी छात्र ने पहले स्कूल के वॉटर टैंक में कुछ मिलाने की भी कोशिश की थी जो की पूरी तरह से नाकाम रही।

पड़ोसियों के लिए गए थे बयान

आपको बता दें कि सामाजिक रिपोर्ट में आरोपी छात्र के साथ पढ़ने वाले बच्चों के और कुछ पड़ोसियों के बयान भी दिखाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि वह एक बहुत अच्छा दोस्त था और उसने कभी लड़ाई-झगड़ा नहीं किया। वहीं, पड़ोसियों ने भी उस छात्र के व्यवहार की जमकर तारीफ की लेकिन कुछ पड़ोसियों से बातचीत में सामने आया कि छात्र पारिवारिक कलह की वजह से काफी चिड़चिड़ा-सा रहता था।

‘बोर्ड के फैसले से संतुष्ट हूं’

प्रद्युम्न की हत्या के आरोपी छात्र पर बालिग की तरह ही केस चलाया जाएगा बोर्ड के इस फैसले से प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर को काफी राहत मिली है। बोर्ड का फैसला आने के बाद बरुण ठाकुर ने कहा कि हालांकि, छात्र के पक्ष की तरफ से हर मुमकिन प्रयास किया गया कि उस पर नाबालिग की तरह ही केस चले, लेकिन बोर्ड ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुझे काफी राहत पहुंचाई है। वरुण ठाकुर ने साथ ही यह भी कहा है कि अपने 7 साल के मासूम बच्चे को अचानक गंवा देने का मुझे आज भी काफी दुख है।

हमेशा की तरह मैं उसे यही सोच कर स्कूल छोड़कर आया था कि शाम को मेरा बेटा हसता हुआ ही वापस लौटेगा, लेकिन बेटे की दर्दनाक, बर्बरतापूर्ण तरीके से हत्या कर दी गई। बेटे को गंवाने का दुख बयां करना मेरे लिए काफी मुश्किल है, इसलिए यह नहीं कह सकता कि फैसले से खुशी हुई है, लेकिन संतोष जरूरत मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीबीआई जल्द ही चार्शीट दाखिल कर देगी और उनके बेटे को जल्द ही पूरी तरह से न्याय भी मिल जाएगा।

‘आरोपी बिगड़ा हुआ बच्चा’

जेजे बोर्ड ने आरोपी पर दिए फैसले में कहा है कि सामाजिक रिपोर्ट के अनुसार आरोपी छात्र काफी बिगड़ा हुआ बच्चा है, जो पढ़ाई में एवरेज से भी कई ज्यादा नीचे रहा है। वह स्कूल में मोबाइल का भी काफी इस्तेमाल करता था, शराब का सेवन करता था और साथ ही वह काफी अग्रेसिव भी है। स्टूडेंट की मानसिक क्षमता इतनी है कि वह कोई भी जघन्य अपराध प्लान कर सकता है भविष्य में और भी ज्यादा खतरनाक अपराध कर सकता है।
22 नवंबर को बोर्ड ने छात्र से कई सारे सवाल पूछे था और उसने पूरे आत्मविश्वास के साथ जवाब दिए थे। उसने बताया कि किन परिस्थितियों में उसने ऐसा किया था। जबकि इससे पहले सीबीआई के सामने उसने कोई और ही कहानी बताई थी। इससे यह बात साफ हो गई है कि स्टूडेंट के पास पूरी मानसिक क्षमता है कि वह खुद को बचाने के लिए कोई भी कहानी बना सकता है।
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जानें मनमोहन सरकार को हिला देने वाले 2-जी घोटाले में कब-कब क्या हुआ

मनमोहन सिंह को हिलाकर रख देने वाले 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में आज  का सबसे बड़ा फैसला आ गया है और इस घोटाले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है।

आपको बता दें कि 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में आज सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों की काफी कमी होने की वजह से घोटाले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है। 6 साल तक चले इस ट्रायल के बाद कोर्ट में आज इस घोटाले के मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी और कई और लोगों के भविष्य का फैसला होना था।

अदालत ने इस घोटाले के सभी आरोपियों को बरी करने का एक लाइन का फैसला सुनाया है। विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओ पी सैनी ने यूपीए सरकार के समय में हुए 2-जी घोटाले में सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज किए गए अलग अलग मामलों की सुनवाई की जा रही थी।

जानें 2-जी घोटाले में कब, क्‍या हुआ

मई 2007: डीएमके नेता ए राजा की दूसरी बार दूरसंचार मंत्री के रूप में नियुक्ती हुई

अक्टूबर 2007: केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मोबाइल सेवाओं के लिए 2-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की सभी संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया

सितम्बर-अक्टूबर 2008: सभी दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम लाइसेंस दे दिए गए थे

अक्टूबर 2009: यही वो खास दिन था जिस दिन सीबीआई ने 2-जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच करने के लिए मामला दर्ज किया

अक्टूबर 2009: घोटाले के पूरे मामले की जांच करने के लिए सीबीआई ने सबसे पहले दूरसंचार विभाग के कार्यालयों पर छापेमारी की

अक्टूबर 2010: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने जांच करने के बाद दूसरी पीढ़ी को मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों का उल्लंघन करने के मामले में दोषी पाया

नवंबर 2010: साल 2010 में दूरसंचार मंत्री ए राजा को हटाने की मांग काफी जोरो शोरो से की गई थी जिसे लेकर विपक्ष ने संसद की कार्यवाही को ठप कर दिया था और साथ ही राजा ने स्तीफा दिया

नवम्बर 2010: 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर संसद में गतिरोध लगातार चलता रहा

दिसम्बर 2010: दूरसंचार विभाग द्वारा हाई-कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी पाटिल समिति को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों एवं नीतियों को देखने के लिए अधिसूचित कर दिया गया था

दिसम्बर 2010: 2-जी घोटाले के मामले में राजा से सीबीआई ने पूछताछ करनी शुरू कर दी थी

फरवरी 2011: 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया को सीबीआई ने अपनी गिरफ्त में ले लिया था।

अब जानें कैसे हुआ 2-जी घोटाले का पर्दाफाश

22 नवंबर 2007: वित्त सचिव द्वारा 2001 की दरों पर लाइसेंस और 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर विरोध दर्ज करा दिया गया

29 नवंबर 2007: दूरसंचार विभाग के सचिव ने इस मांग को मानने से साफ तौर पर इनकार कर दिया।

26 दिसंबर 2007: ए. राजा ने स्पेक्ट्रम के मूल्य को लेकर मंत्री समूह के अध्यक्ष प्रणब मुखर्जी और महाधिवक्ता गुलाम वाहनवती के साथ चर्चा का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा

26 दिसंबर 2007: प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री को एक पत्र तो जरूर लिखा लेकिन उन्होंने उस पत्र में राजा के साथ अपनी बैठक का कोई भी किसी भी तरह का जिक्र नहीं किया

10 जनवरी 2008: 15 कंपनियों को 121 लाइसेंसों के लिए कई आशय पत्र जारी किए गए

15 जनवरी 2008: चिदंबरम ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखते हुए कहा था कि राजा ने जो भी किया वह साफ तौर पर ‘अध्याय बंद’ है

30 जनवरी 2008: राजा ने चिदंबरम के साथ मिलकर ऑपरेटरों की संख्या और स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग को सुरक्षित करने की जरूरतों के बारे में विस्तार से चर्चा की

4 जुलाई 2008: प्रधानमंत्री, चिदंबरम और राजा ने स्पेक्ट्रम शुल्क और 6.2 मेगाहर्ट्ज के परे कीमत पर चर्चा के लिए बैठक की

23 सितंबर 2008: स्वान ने सबसे पहले एतिसलात के साथ सौदा पक्का किया और उसके एक महीने के बाद ही यूनीटेक ने टेलीनॉर के साथ अपना सौदा पक्का कर लिया

28 मई 2009: यूपीए के दूसरे कार्यकाल में एक बार फिर से राजा को दूरसंचार मंत्री के तौर पर नियुक्त किया गया

21 अक्टूबर 2009: सीबाआई ने इस पूरे मामले में एफआइआर दर्ज की

14 नवंबर 2010: राजा ने अपने दूरसंचार मंत्री के पद से इस्तीफा दिया

16 नवंबर 2010: सीएजी रिपोर्ट में 2जी घोटाले में 1.76 लाख करोड़ का नुकसान आंका गया

18 नवंबर 2010: ट्राई ने 121 लाइसेंसों में से 69 लाइसेंसों को रद्द करने की सिफारिश की

फरवरी 2011: राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहरा और राजा के निजी सचिव आर.के. चंदोलिया तो गिरफ्तार कर लिया गया

2 अप्रैल, 2011: सीबीआई ने पहला आरोपपत्र दाखिल कर दिया

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6 महीने की सजा के बाद रिहा हुए पूर्व न्यायाधीश सीएस कर्णन  

कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सीएस कर्णन को अदालत की अवमानना करने के मामले में छह महीने की सजा पूरी हो गई है जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। ऐसा भारत में पहली बार हुआ है कि किसी न्यायाधीश को कारावास की सजा कांटनी पड़ी हो।

आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने उन्हें मई के महीने में  छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी। पूर्व न्यायाधीश की पत्नी सरस्वती का कहना है कि कर्णन को बुधवार की सुबह करीब 11 बजे प्रेसिडेंसी करेक्शनल होम से रिहा कर दिया गया था। कर्णन के साथ चेन्नई से यहां सरस्वती और उनके बड़े बेटे आए थे।

इतना ही नहीं पुलिस से कर्णन एक महीने तक बचते रहे और आखिरकार पुलिस ने 20 जून को कोयंबटूर से गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके साथ ही 9 मई को उच्चतम न्यायालय ने उन्हें 6 महीने जेल की सजा सुनाई थी। आपको बता दें कि उस समय कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीश भी थे। कर्णन उच्च न्यायालय के अकेले ऐसे न्यायाधीश हैं जिन्हें पद पर रहते हुए ही 6 महीने की जेल की सजा सुनाई गई हैं।

आपको बता दें कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश जीएस खेहर की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय पीठ ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था कि वह कर्णन को हिरासत में ले। जिसके बाद कर्णन और उच्चतम न्यायालय के बीच कई महीने तक गतिरोध भी देखने को मिला था। यह पहली बार नहीं है बल्कि इससे पहले भी उच्चतम न्यायालय ने अवमानना के एक मामले में कर्णन की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था।

इसके साथ ही आपको बता दें कि कर्णन ने 1983 में वकील के रूप में तमिलनाडु बार काउंसिल में अपना पंजीकरण करा दिया था और उनकी 2009 में मद्रास उच्च न्यायालय में जज  के तौर पर नियुक्ती हुई थी जिसके बाद 11 मार्च, 2016 को उनका तबादला कलकत्ता उच्च न्यायालय में कर दिया गया था।

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पांच जिले उत्तर प्रदेश से हटकर हरियाणा और उत्तराखंड में शामिल हो सकते हैं : सूत्र

अगर अपने सूत्रों पर भरोसा किया जाए तो बताया जा रहा हैं कि सहारनपुर और बिजनौर बहुत जल्द उत्तराखंड में शामिल हो सकते है और साथ ही यह भी कहा जा रहा हैं कि मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली को हरियाणा में शामिल किया जा सकता है। इस मामले में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री इस बारे में पहले ही चर्चा कर चुके है। इसके साथ ही आपको बता दें कि 31 मार्च 2018 तक यह मसौदा सभी के सामने पेश कर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि ऐसा करने से केंद्र सरकार एक तीर से कई निशाने साधेगी जैसे कि ऐसा करने से कई सालों से उठती आ रही हरित प्रदेश की मांग भी खत्म होती हुई नजर आएगी, इसके साथ ही पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बनवाने की मांग पर भी पूरी तरह से विराम लग जाएगा, मायावती और मुलायम सिंह यादव की राजनीति भी खत्म हो जाएगी और साथ ही अजीत सिंह की जाटों वाली राजनीति से देश को छुटकारा मिलेगा।

आपको बता दें कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के पाॅचो जिले दलित और मुस्लिम बाहुल्य है जिससे मायावती और मुलायम को राजनीति करने में काफी आसानी होती नजर आती रही है और अजीत सिंह भी जाट लोबी के नाम पर हर बार अपने ही फायदे की राजनीति करते हैं। इसलिए केंद्र सरकार ने इन सभी परेशानियों से देश को छुटकारा दिलाने का मन बना लिया है।

एक वरिष्ठ पत्रकार और उनके मित्र उच्च पदासीन अधिकारी के हवाले से यह खबर दी गई है कि उत्तर प्रदेश के पाँच जिले हरियाणा और उत्तरांचल राज्य में शामिल हो सकते है। इसके साथ ही आपको बता दें कि जल्द ही मोदी सरकार हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकार के साथ मिल कर देश के हित में एक काफी बड़ा फैसला ले सकती है।

इसके साथ ही सूत्रों ने यह जानकारी भी दे दी है कि दो महिने पहले इस विष्य में फैसला लेने के लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल के मुख्यमंत्रियों के साथ ही साथ कुछ प्रमुख सचिव के साथ मोदी जी ने बैठक की थी। सभी लोगों से इस विष्य पर विस्तार से चर्चा की गई और कुछ जनपदों को हरियाणा और कुछ को उत्तराखंड में मिलाने के लिये संभावनाएं तलाशी गई।

आपको बता दें कि तीनों राज्यों में इस समय बीजेपी की सरकार है और केंद्र में भी बीजेपी की सरकार ने ही अपने पांव जमा रखे है और यह फैसला लेने के लिए इससे अच्छा समय बीजेपी को शायद ही कभी मिल पाएगा। इसके साथ ही पाँच जिलो के उत्तर प्रदेश से बहार जाने के बाद निश्चित रूप से सपा बसपा प्रदेश में पूरी तरह से कमजोर हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक बताया जा रहा है कि इस पर फैसला पहले ही लिया जा चुका है और 31 मार्च तक यह जनता के सामने सार्वजनिक रूप से आ सकता है।

इसके साथ ही ध्यान रहे कि यह समाचार अपुष्ठ सूत्रों से मिली खबर के आधार पर लिखा गया है रिपोर्टर समाचार की सत्यता के लिए जिम्मेदार नही कहलाया जाएगा।

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हार्दिक, जिग्नेश, अल्पेश का पीएम मोदी पर हमला- बोरिंग हो गए हैं मोदी, छोड़ दें राजनीति

हाल ही में गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव खत्म हुए है और दोनों जगह बीजेपी ने अपनी जीत का परचम लहरा दिया है। गुजरात विधानसभा चुनावों में 99 सीटें जीतकर छठी बार सरकार बनाने का बीजेपी का रास्ता अब पूरी तरह से साफ नजर आ रहा है। लेकिन इस बार के चुनाव में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश मेवानी और ठाकोर समुदाय से आने वाले अल्पेश ठाकुर कांग्रेस को 77 सीटें दिलाने में काफी मुख्य भूमिका निभाते हुए नजर आए है।

आपको बता दें कि मीडिया खबरों से खास बातचीत के दौरान इन तीनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजनीति छोड़ने तक की सलाह दे दी है। इसके साथ ही इन तीनों नेताओं ने कहा कि पीएम मोदी को आरक्षण, विकास, नौकरियों और किसानों के अधिकारों को लेकर लड़ाई नहीं लड़नी चाहिए। हाल ही में पीएम मोदी ने एक बयान देते हुए कहा यह तीनों नेता जाति के आधार पर समाज का ध्रुवीकरण कर रहे हैं, इस बयान पर पलटवार करते हुए मेवानी ने कहा, ”मोदी अब बूढ़ापे के दौर में आ चुके हैं और वह हर बार बोरिंग भाषण देते हैं, जिसमें कोई नया कंटेंट देखने को नहीं मिलता। उन्हें अब रिटायर हो जाना चाहिए और घर बैठ कर चैन की नींद लेनी चाहिए”।

इलसके साथ ही मेवानी ने कहा, ”हमने उन्हें हर बार विकास के मुद्दे पर घेरा है, जातिवाद पर नहीं। जब हम तीनों 2 करोड़ बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार की बात करते हैं तो हम दलित या पटेलों का जिक्र कभी नहीं करते”। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह 2019 में भी मोदी और बीजेपी को चुनौती देंगे, क्योंकि बीजेपी के खिलाफ दलितों में गुस्सा होते हुए भी बीजेपी हर बार जीत हासिल कर रही है? इस पर उन्होंने कहा कि 18 प्रतिशत दलित जनसंख्या हमेशा ही बीजेपी के खिलाफ वोट डालेगी।