पीएम मोदी ने बजट 2019 की सराहना की, विपक्षी बोले – क्रांतिकारी परिवर्तन की जरूरत

नई दिल्ली:  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश किया. दो घंटे नौ मिनट तक चले निर्मला सीतारमण के भाषण में मिडिल क्लास से लेकर महिलाओं को शसक्त बढ़ाने को लेकर कई योजनाए पेश की हैं. बता दें कि देश की स्वतंत्रता के बाद यह पहली बार है जब किसी महिला ने सदन में बजट पेश किया है. जिसकी चौतरफा सराहना की जा रही है. वहीं कांग्रेस पार्टी ने बजट के प्वाइंट्स पर एक-एक कर निशाना साधा है और कहा है कि 45 सालों में उच्चतम बेरोजगारी देने वाली भाजपा को क्रांतिकारी परिवर्तन की जरूरत है.

पीएम मोदी बजट सराहते हुए बोले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए बजट की तारीफ की  इसे एक बेहतरीन बजट बताया है. पीएम ने कहा कि इस बजट से गरीब को बल मिलेगा और युवाओं को बेहतर कल मिलेगा। इस बजट के माध्यम से मध्यम वर्ग को प्रगति मिलेगी. विकास की रफ्तार को गति मिलेगी.

पीएम ने कहा कि इस बजट से टैक्स व्यवस्था में सरलीकरण होगा, इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण होगा. ये बजट उद्यम और उद्यमों को मजबूत बनाएगा, देश में महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ाएगा. ये एक ग्रीन बजट है जिसमें पर्यावरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सोलर सेक्टर पर विशेष बल दिया गया है.

पिछले 5 साल में देश निराशा के वातावरण को पीछे छोड़ चूका है.

आज देश उम्मीदों और आत्मविश्वास से भरा हुआ है. इस बजट में आर्थिक जगत के रिफॉर्म भी हैं. आम नागरिक के लिए ईज ऑफ लिविंग भी है और साथ ही गांव और गरीब का कल्याण भी है.आज लोगों के जीवन में नई आकांक्षाएं और अपेक्षाएं हैं. ये बजट देश को विश्वास दे रहा है कि इन्हें पूरा किया जा रहा है. ये विश्वास दे रहा है कि दिशा सही है, प्रोसेस ठीक है, गति सही है इसलिए लक्ष्य तक पहुंचना तय है.पिछले 5 वर्षों में हमारी सरकार ने गरीब, शोषित और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए अनेक कदम उठाये हैं. अब अगले 5 वर्षों में यही शक्तिकरण उन्हें देश के विकास का पावर हाउस बनाएगा.

मुझे विश्वास अगले पांच सालों में 5 ट्रिलियन होगी अर्थव्यवस्था-गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बजट पर अपनी बात रखी और कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था पिछले 5 साल में हमारी अर्थव्यवस्था दुगुनी हो चुकी है. मुझे विश्वास है कि जब हम आगामी पांच साल पूरा करेंगे तब हम 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को प्राप्त कर सकेंगे. वहीं नितिन गडकरी ने कहा कि हम नए भारत के निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं. वित्त मंत्री ने बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी है. गडकरी ने कहा 2018-2019 में 78,626 करोड़ का बजट दिया था जबकि इसबार 83000 करोड़ का बजट दिया गया है.

कांग्रेस बोली- 45 सालों में उच्चतम बेरोजगारी देने वाली भाजपा को क्रांतिकारी परिवर्तन की जरूरत

कांग्रेस पार्टी के नेता इसबार बजट पर खुलकर बोलने सामने नहीं आए हैं बल्कि उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया है. कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर बजट पर अपनी बात रखते हुए कांग्रेस पार्टी ने कहा कि बजट के जरिए भारत को एक ऐसे वादे की जरूरत है, जो शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए. शिक्षा के लिए समर्पित संसाधनों में महत्वपूर्ण वृद्धि समाज के सभी नागरिकों के सशक्तिकरण को सुनिश्चित करेगी, जो भारत के विचार का मौलिक सिद्धान्त है.

5 साल में सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बजट में 13% की कटौती के कारण स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों की संख्या में भारी कमी आई है. बजट के जरिए भारत को स्वास्थ्य पर खर्च जीडीपी के 3% तक होने की जरूरत है, ताकि बिहार, असम, यूपी में आए स्वास्थ्य संकटों को टाला जा सके.

अब जब अंततः सरकार ने 45 साल की उच्चतम बेरोजगारी की हकीकत को स्वीकार कर लिया है, तो बजट के जरिए देश में रोजगार सृजन के लिए एक विस्तृत योजना की जरूरत है. इससे जीएसटी और नोटबंदी के विपरीत प्रभावों से निपटने में मदद मिलेगी.मात्र दो साल (2017-18 से 2019-2020) में महिलाओं से सम्बंधित योजनाओं के बजट में 2000 करोड़ से ज्यादा की कटौती की गई.

बजट के जरिए भारत को देश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पर्याप्त संसाधनों और सटीक योजना की जरूरत है.भारी जल संकट और सूखे के बीच पिछले 4 साल के दौरान सिंचाई के बजट में 433 करोड़ की कटौती के कारण किसान आत्महत्याओं और कर्जे में वृद्धि हुई है. बजट के जरिए किसानों को कर्जे के जाल से मुक्ति दिलाने के लिए ठोस कृषि नीति की जरूरत है.

कांग्रेस पार्टी के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर कहा कि बजट में कुछ तो मिसिंग है. रोजगार सृजन के लिए उच्च प्रत्याशित योजना का कोई संदर्भ नहीं, किसानों को कीमत में गिरावट और सूखे से निपटने के लिए कोई उपाय नहीं, मैं देख रहा हूं कि लेकिन सामग्री कहां है? यह बजट सत्र केवल एक टेबल थम्पिंग सभा के लिए कम हो गया था.

बजट बड़ा रिफॉर्म लाने वाला

मणिपाल ग्लोबल एजूकेशन के निदेशक मोहनदास पाई ने कहा, ये बजट एक बड़ा रिफार्म लाएगा. इसमें सबसे अच्छी बात है कि भारत बाहर से कर्ज लेगी. जिससे हमारे यहां कि लिक्विडीटी बढ़ेगी. मैं 10 में से 8 नंबर दूंगा. यह बजट इंफ्रास्ट्रचर रिफार्म, पब्लिक रिफार्म, फाइनेंसिएल रिफार्म पर फोकस करता है. निराशा एक चीज से हुई कि इन्होंने स्टार्टअप के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोदी सरकार को बड़ा झटका दिया

नई दिल्ली:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार के मसलों पर अपना सख्त रुख अख्तियार करते हुए जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (जीएसपी) के तहत भारत के लिए 5.6 अरब डॉलर की व्यापार रियायत 5 जून से समाप्त करने का फैसला किया है. ट्रंप ने शुक्रवार रात कहा, ‘मैंने पाया है भारत ने अमेरिका को आश्वस्त नहीं किया है कि वह उसे समतुल्य व उचित बाजार में पैठ प्रदान करेगा.’

उन्होंने कहा, ‘तदनुसार 5 जून, 2019 से विकासशील देश के लाभार्थी के तौर पर भारत के ओहदे को समाप्त करना उचित है.’

गौरतलब है कि इस महीने के आखिर में जापान में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली मुलाकात से पहले अमेरिका ने भारत के लिए जीएसपी रद्द किया है.

ट्रंप का मकसद अमेरिका के भारी व्यापार घाटे को समाप्त करना है. इसलिए उन्होंने चीन के साथ व्यापार जंग के साथ-साथ कई देशों से अमेरिका में आयात होने वाली वस्तुओं पर शुल्क लगाया है.

उन्होंने बुधवार को मेक्सिको से आयातित वस्तुओं पर दंडात्मक शुल्क बढ़ाने की घोषणा की.

भारत के साथ-साथ तुर्की की भी जीएसपी के तहत व्यापार रियायत समाप्त कर दी गई है.

जीएसपी कार्यक्रम के दायरे में 1975 में आया भारत इस कार्यक्रम के तहत अमेरिका में सबसे बड़ा लाभार्थी है.

हालांकि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के अनुसार, 2017 में कुल निर्यात का मूल्य 76.7 अरब डॉलर था, जिसका जीएसपी निर्यात 5.6 अरब डॉलर एक छोटा-सा हिस्सा है.

भारत और अमेरिका के बीच 2017 में 126.2 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जिसमें अमेरिका का व्यापार घाटा 27.3 अरब डॉलर था.

अमेरिकन एपेरल एंड फुटवियर एसोसिएशन ने यूएसटीआर को लिखा है कि अगर इंडोनेशिया और थाईलैंड के साथ-साथ भारत से जीएसपी फायदा वापस लिया जाता है तो उनके पास चीन की तरफ लौटने के सिवा कोई उपाय नहीं होगा.

 

 

 

गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर हालातों पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात की

नई दिल्ली: 

गृहमंत्री का कार्यभार संभालते ही अमित शाह एक्शन में आ गए हैं. सबसे पहले तो गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी को उनके गैर जिम्मेदारा बयान के लिए क्लासलगाई. उसके बाद जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात की. सत्यपाल मलिक ने शनिवार को नए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से यहां मुलाकात की और उन्हें राज्य की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी. अपने नॉर्थ ब्लॉक कार्यालय में लगभग आधे घंटे की बैठक में शाह ने जम्मू-कश्मीर के हालात का जायजा लिया. 
अमित शाह को जम्मू-कश्मीर के विकास कार्यों से अवगत कराया.

सत्यपाल मलिक ने बैठक के बाद मीडिया से कहा, ‘मैंने उन्हें (अमित शाह) जम्मू-कश्मीर की प्रमुख समस्याओं और विकास कार्यो के बारे में अवगत कराया. लेकिन हमने ज्यादातर बात हाल में हुए लोकसभा चुनावों के बारे में की.

जम्मू-कश्मीर की स्थिति बदल गई है

मलिक ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में स्थिति बदल गई है. आतंकवादी मारे जा रहे हैं, नए आतंकवादियों की भर्ती कम हुई है, और पत्थरबाजी बंद हो गई है.
अमित शाह जम्मू-कश्मीर में विकास की पहल करेंगे

जम्मू एवं कश्मीर में आगे की नीति पर शाह का निर्णय बहुत महत्वपूर्ण होगा. अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा और विकास की पहल को आगे बढ़ाने की संभावना है. शाह और मलिक ने इन मुद्दों पर भी चर्चा की.

अमरनाथ यात्रा पर हुई चर्चा

इसके अलावा, उन्होंने आतंकवादियों पर दबाव बनाए रखने और अमरनाथ यात्रा को सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की. केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में शाह की भूमिका इस बात पर भी स्पष्टता ला सकती है कि केंद्र राज्य में अनुच्छेद 35ए के मुद्दे को कैसे हल करना चाहता है.

मलिक के अलावा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव और केरल के राज्यपाल पी. सदाशिवम ने पदभार संभालने के बाद शाह से मुलाकात की

PM मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन शामिल होंगे जानिए

नई दिल्ली
लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस के भीतर जारी नेतृत्व संकट के बीच पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और UPA अध्यक्ष सोनिया गांधीगुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। यह फैसला अहम है क्योंकि चुनाव के दौरान बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के बीच काफी तीखे हमले देखने को मिले थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद भी राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचेंगे। कांग्रेस के इस फैसले से साफ है कि पार्टी पीएम के शपथ ग्रहण से दूरी बनाकर कोई गलत संदेश देना नहीं चाहती है।

गौरतलब है कि चुनावों में बीजेपी ने अकेले 303 सीटें जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल किया जबकि कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। उसे मात्र 52 सीटें ही मिलीं। एक तरफ टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने समारोह में शामिल होने से मना कर दिया है तो वहीं कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं का पहुंचना महत्वपूर्ण संकेत है।

पुदुचेरी के मुख्यमंत्री नारायणसामी भी इस समारोह में पहुंचेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस शासित राज्यों जैसे- मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के मुख्यमंत्री भी मोदी के शपथ ग्रहण में दिख सकते हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बखेल ने कहा है कि वह पीएम मोदी को बधाई देना चाहते हैं पर पहले से तय प्रतिबद्धताओं के कारण शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे।

चुनाव के दौरान पीएम मोदी और राहुल गांधी ने एक दूसरे पर जमकर निशाना साधा था। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि गुरुवार को दोनों नेताओं के बीच मुलाकात की कैसी तस्वीर सामने आती है।

पीएम नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान को नजरअंदाज करते हुए BIMSTEC के राष्ट्राध्यक्षों समेत 8 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। बिम्सटेक में भारत समेत दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के वे 7 देश शामिल हैं, जो बंगाल की खाड़ी से जुड़े हुए हैं। इन देशों में भारत के अलावा बांग्लादेश, म्यांमार, श्री लंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान शामिल हैं। भारत ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति और मॉरीशस के प्रधानमंत्री को भी आमंत्रित किया है।

सरकार में शामिल नहीं होंगे अरुण जेटली, मोदी को लिखी चिट्ठी

वित्त मंत्री और किसी समय बीजेपी के दिग्गज़ नेता रहे अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर कहा है कि वह स्वास्थ्य कारणों से उनकी सरकार में फ़िलहाल शामिल नहीं होंगे। उनका यह फ़ैसला ऐसे समय आया है जब मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था के जानकार और कड़े फ़ैसले लेने वाले ऐसे आदमी की ज़रूरत है, जो हर हाल में डावाँडोल अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सके। इस ख़त के साथ यह सवाल भी उठने लगा है कि जेटली की जगह कौन लेगा।

अगली सरकार 30 मई को शपथ लेगी। जेटली राज्यसभा सदस्य हैं और वह तकनीकी रूप से मंत्री बन सकते हैं। पर उन्होंने फ़िलहाल किसी तरह के सरकारी कामकाज से ख़ुद को दूर रखने का फ़ैसला किया है। मोदी को लिखे ख़त में उन्होंने कहा है कि वह पिछले 18 महीनों से बुरी तरह बीमार रहे हैं, चिकित्सा कराने और डॉक्टरों की सलाह से वह संकट से कुछ हद तक बाहर निकलने में कामयाब रहे हैं। पर वह चाहते हैं कि अभी कुछ समय ख़ुद को दें, अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें, इसलिए उन्हें सरकार में शामिल न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि वह अनौपचारिक रूप से सरकार का कामकाज थोड़ा बहुत कर सकते हैं, पर किसी तरह की ज़िम्मेदारी उठाने की स्थिति में नहीं हैं।

मालूम हो, जेटली लंबे समय से बीमार हैं और उन्होंने देश में लंबे इलाज के बाद अमेरिका में भी अपनी चिकित्सा कराई है। वहाँ उन्हें काफ़ी राहत मिली, पर उन्हें स्वस्थ्य नहीं कहा जा सकता है।

जेटली की जगह कौन?

अरुण जेटली की जगह कौन लेगा, यह अभी साफ़ नहीं है और तरह तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अर्थव्यवस्था बुरी स्थिति में है। चुनाव जीतने और सरकार गठित करने के बाद अब पूरा ध्यान अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने पर ही होगा। ऐसे में रेल मंत्री पीयूष गोयल या पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को वित्त मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी जा सकती है। यह भी मुमकिन है कि मोदी किसी अर्थशास्त्री को यह काम सौंपें।

जीएसटी

वकील से राजनेता बने अरुण जेटली मोदी सरकार को विपदा से बाहर निकालने वाले शख़्स के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने कई बार कई गंभीर मुद्दों पर सरकार का बचाव ज़बरदस्त ढंग से किया है और विपक्ष को सदन में और उसके बाहर क़रारा जवाब दिया है। यह अरुण जेटली ही हैं, जिन्होंने लगभग दो दशकों से ठंडे बस्ते में पड़े गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी जीएसटी को लंबे जद्दोजहद के बाद संसद से पारित करवाया। यह वह विवादास्पद मुद्दा है, जिस पर ख़ुद उनकी पार्टी एकमत नहीं थी, विपक्षा उसके ख़िलाफ़ था और अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग राय थी। पर जेटली ने इस मुद्दे पर लगभग एकमत कायम करवा लिया। हालाँकि हड़बड़ी में और बग़ैर पूरी तैयारी के उसे लागू करने का आरोप सरकार पर लगा था, पर वित्त मंत्री यह समझाने मे कामयाब रहे कि इसका कोई विकल्प नहीं है। जेटली जीएसटी लागू करवाने वाले वित्त मंत्री के रूप में याद किए जाएँगे।

जेटली मोदी सरकार में वित्त के अलावा रक्षा और सूचना व प्रसारण मंत्रालय का कामकाज भी संभाल चुके हैं।

चुनाव हारने के बावजूद मंत्री बनेगें ‘मनोज सिन्हा’

के. पी. मलिक, वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 में प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी कल (गुरुवार) को लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ मंत्रिमंडल में और कौन-कौन नेता शामिल होंगे इसको लेकर लगातार अटकलों का दौर चल रहा है। इस बीच कार्यकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच मंगलवार शाम पांच घंटे की मैराथन मीटिंग हुई। पार्टी सूत्र बता रहै है कि इसी दौरान दोनों नेताओं ने मंत्रिमंडल पर मुहर लगा दी है।

ऐसे में टीम मोदी को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। उम्मीद है कि मोदी कैबिनेट में मंत्री बनने वालों को बुधवार शाम तक शपथ ग्रहण का न्योता पहुंच जाएगा। सबसे ज्यादा 64 सांसद देने वाले उत्तर प्रदेश से कौन-कौन मंत्रिमंडल में शामिल होगा, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं।

सूत्रों के अनुसार मौजूदा समय में यूपी कोटे से मंत्री राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी, अनुप्रिया पटेल तो शपथ लेंगे ही, इसके अलावा गाजीपुर से लोकसभा चुनाव हारने वाले केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को भी टीम मोदी में जगह मिलने की खबर सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि उन्हें कैबिनेट रैंक मिल सकता है। चर्चा यहां तक है कि उन्हें स्मृति ईरानी की जगह राज्यसभा भेजा जाएगा।

इन चेहरों के अलावा कई नए नाम भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं। इनमे प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय, धरौहरा से दोबारा जीत हासिल करने वाली रेखा वर्मा, प्रयागराज से लोकसभा पहुंचने वाली रीता बहुगुणा जोशी, महराजगंज से जीते पंकज चौधरी, आगरा से जीते एसपी सिंह बघेल और मुजफ्फरनगर से जीतने वाले संजीव बालियान गुरुवार को शपथ ले सकते हैं।

बता दें नए मंत्रिमंडल के लिए गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले मंगलवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच लंबी बैठक हुई थी। माना जा रहा है कि बैठक के दौरान मंत्रिमंडल के भावी स्वरूप को लेकर खाका तैयार कर लिया गया है। बुधवार शाम तक भावी मंत्रियों को इसकी सूचना दे दी जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक, मोदी कैबिनेट में तेलंगाना और पश्चिम बंगाल से जीते सांसदों को ज्यादा तवज्जो मिल सकती है। इसके अलावा प्रमुख चेहरों के अलावा कई नए चेहरों को टीम मोदी में शामिल किया जा सकता है। इसमें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का भी नाम चर्चा भी है। लेकिन इसे लेकर सूत्रों की अलग-अलग राय है। कुछ ही महीने बाद महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी में कुछ नेता चाह रहे हैं कि अमित शाह ही अध्यक्ष बने रहें। ऐसे में हो सकता है कि शाह मंत्रिमंडल में शामिल न हों।

के. पी. मलिक वरिष्ठ पत्रकार हैं और राजनीतिक विषयों पर लिखते रहते हैं।

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गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने दिया इस्तीफा, कौन होगा नया सीएम

गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ कल इस्तीफा दे दिया है। बुधवार को ओ पी कोहली ने विधानसभा भंग करते हुए नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त कर दिया था।

इसके साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि गुजरात के हाल ही में बने नए बीजेपी विधायक आज राज्य का अगला मुख्यमंत्री चुनने के लिए गांधीनगर में अहम बैठक करने वाले है। आपको बता दें कि गुरुवार को उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल और बाकी सभी मंत्रियों के साथ विजय रूपाणी गांधीनगर में राजभवन गए थे और वहां जाकर उन्होंने राज्यपाल को अपने इस्तीफे पत्र सौंप दिए।

फिलहाल जब तक किसी नई सरकार का गठन नहीं हो जाता तब तक विजय रूपाणी ही कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। पटेल ने राजभवन के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए बताया था कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उनके पूरे मंत्रिमंडल ने राज्यपाल ओ पी कोहली को अपने इस्तीफे दिए जिसे राज्यपाल ओ पी कोहली द्वारा स्वीकार भी कर लिया गया हैं।

उन्होंने आगे बताया है कि, सत्तारुढ़ दल के नए नेता का चयन करने के लिए सभी पार्टी विधायक पर्यवेक्षकों और प्रभारी नेताओं के साथ एक अहम बैठक करेंगे। यहां तक की सभी विधायकों को भी इस बैठक में मौजूद रहने के लिए सूचना भी दे दी गई है।

इसके साथ ही आपको बता दें कि मुख्यमंत्री पद के लिए रूपाणी के अलावा जिन लोगों का नाम सबसे आगे चल रहा है उनमें नितिन पटेल और गुजरात से राज्यसभा सदस्य मनसुख मंडाविया शामिल हैं। मंडाविया पाटीदार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

राज्यपाल ओ पी कोहली ने चुनाव नतीजे के बाद गुरुवार को विधानसभा भंग कर दी थी। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 182 सदस्यीय विधानसभा में 99 सीटें हासिल कर सत्ता बरकरार रखी है।

लेकिन अब इसमें यह बात देखना अब भी बाकी है कि क्या रूपाणी की घटती लोकप्रियता को देखकर बीजेपी रूपाणी पर दोबारा दाव लगाने का साहस कर पाएगी। क्योकि जब रूपाणी को सीएम बनाया गया था तब सीटें 115 हुआ करती थी लेकिन अब यह घटकर 99 तक पहुंच चुकी है।

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कौन होगा हिमाचल प्रदेश का नया सीएम?

हाल ही में हिमाचल प्रदेश के चुनाव खत्म हुए है और 18 दिसंबर को चुनाव के परिणाम भी सबके सामने आ चुके है। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की सरकार ने अपने पांव जमा लिए है। अब चर्चा का विष्य यह बना हुआ है कि हिमाचल प्रदेश में सीएम बनना किसके लिए सबसे आसान होगा। और इस रेस में जयराम ठाकुर का सीएम बनना लगभग तय लग रहा है।

आपको बता दें कि सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अभी इसकी आधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं की गई हैं, लेकिन आज वीरवार को शिमला में होने वाली बीजेपी विधायक और कोर कमेटी की बैठक के बाद उनके सीएम बनने की घोषणा किए जाने की संभावना लगभग तय ही नजर आ रही है। इतना ही नहीं जयराम ठाकुर मंडी 5वीं बार मंडी जिला के सिराज विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। वह बीजेपी सरकार में मंत्री और प्रदेश में बीजेपी अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सीएम पद के लिए फिलहाल जयराम ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है।

इसके साथ ही यह भी खबरें आ रही हैं कि प्रेम कुमार धूमल को बीजेपी पहले ही अपना सीएम उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी। लेकिन धूमल के हार जाने के बाद उनके सीएम पद की दावेदारी पूरी तरह से खत्म हो गई है और अब हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर का नाम सीएम बनने के लिए सबसे आगे आ गया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और आरएसएस प्रचारक अजय जमवाल भी इस दौड़ में शामिल नजर आ रहे हैं।

आपको बता दें कि जयराम ठाकुर जाति से राजपूत हैं। शायद एक वजह यह भी है कि उनके नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है, क्योंकि प्रदेश में राजपूतों की संख्या भी काफी ज्यादा है। इसी बीच BJP के प्रदेश प्रभारी मंगल पांडे ने बयान दिया है कि सीएम पद पर सहमति बनाने के लिए सभी सीनियर नेताओं से भी एक मीटिंग बुलाकर बात कर दी जाएगी। उन्होंने कहा हैं कि निर्मला सीतारामन और नरेंद्र तोमर भी दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं और अगले 1-2 दिन में प्रदेश को एक नया सीएम निश्चित ही मिल जाएगा।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में नए मुख्यमंत्री की तलाश के लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और नरेंद्र सिंह तोमर को पर्यवेक्षक बनाया गया है। आपको बता दें कि सीएम के नाम पर आखिरी मुहर बीजेपी संसदीय बोर्ड को ही लगानी है। इतना ही नहीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा की 68 सीटों में से बीजेपी को सिर्फ 44 सीटें ही मिली हैं। जबकि कांग्रेस सिर्फ 21 सीटों पर ही सिमट गई। बाकी की बची हुई तीन सीटें अन्य के खाते में चली गई हैं। हिमाचल में बीजेपी को कम से कम 48.6 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस सिर्फ 41.9 फीसदी वोट ही हासिल कर पाई है।

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विपक्ष के हंगामे के चलते नहीं हो पाई सचिन की मेडन स्पीच

आज दोपहर करीब 2 बजे जब राज्य सभा की कार्यवाही शुरू की गई थी तो क्रिकेट जगत के लेजेंड सचिन तेंदुलकर को आज मौजूद सभी लोगों के सामने अपना पहला भाषण देना था। यहां तक की सचिन इसके लिए पूरी तैयारी के साथ भी आए थे और उन्होंने अपना पूरा भाषण एक कागज पर लिखकर रखा हुआ था।

आपको बता दें कि खेल के भविष्य और खेलने के अधिकारों को लेकर आज दोपहर को कुछ समय की चर्चा तय कर दी गई थी, जिसमें सिर्फ सचिन को ही नहीं बल्कि सचिन के साथ पीएल पुनिया को भी अपनी कुछ खास बाते सबके सामने पेश करनी थी।

लेकिन, सदन के शुरू होते ही कांग्रेस के नारेबाजी करने की वजह से सचिन 15 मिनट तक वहां पर खड़े ही रहे। कांग्रेस उस समय 2G और प्रधानमंत्री माफी मांगो के नारों के बीच अपने हंगामे में ही पूरी तरह से मशरूफ थी। इतना ही नहीं सभापति ने उनसे अपील भी की थी कि वह देश के भारत रत्न को भी बोलने का मौका दें। फिर उन्होंने परेशान होकर कहा कि पूरा देश आप सभी लोगों की यह तस्वीर देख रहा है।

आपको बता दें कि 15 मिनट के बाद राज्यसभा को वहीं पर स्थगित कर दिया गया और सचिन अपना भाषण पूरा तो छोड़ो शुरू भी नहीं कर पाए। सभा के स्थगन होने के तुरंत बाद सभी सांसद सचिन को घेर कर खड़े हो गए, जिसमें जया बच्चन भी शामिल थीं। गौरतलब है कि जया बच्चन भी इस बड़े हंगामे के बीच में बार-बार कांग्रेस से अनुरोध कर रही थीं कि वह पहले सचिन को बोलने का मौका दें।

इस पूरे हंगामे के दौरान सचिन की पत्नी अंजलि विजिटर्स गैलरी में बैठे कर सदन में चल रही पूरी कार्यवाही को ध्यान से देख रही थीं। अब जया बच्चन का कहना है कि अगर इसी तरह सब कुछ चलता रहा तो कोई भी नॉमिनेटेड सदस्य बोलने का साहस ही नहीं करेगा, ना ही उसको कभी कुछ भी बोलने की इच्छा होगी और वह कांग्रेस के रवैये से बेहद हताश भी नजर आ रही हैं।

जया बच्चन का कहना है कि कांग्रेस ने सचिन तेंदुलकर को बोलने का एक भी मौका नहीं दिया और यहां तक की कांग्रेस ने भारत रत्न देखकर भी उनका सम्मान नहीं रखा। क्या इस राज्यसभा में सिर्फ सियासतदानों के भाषण होंगे। क्या सिर्फ उन्हीं को बोलने का मौका दिया जाएगा जो चिल्ला सकते हैं। कोई भी साधारण आदमी एक्सपर्ट खिलाड़ी कभी नहीं बोल सकता।
जया बच्चन ने मीडिया खबरों से बातचीत करते हुए कहा कि मैं कांग्रेस की इस हरकत से काफी निराश हूं। मैं वैसे नहीं बोलती हूं, जब तक मैं बहुत निराश ना हो जाऊं। मैंने कई बार समझाने की कोशिश भी की कि उनकी मेडन स्पीच है, उनको बोलने दीजिए। सचिन खेल के इतिहास का एक ऐसा बड़ा नाम है और उन्होंने देश का नाम विश्व में हमेशा ही रोशन किया है। जया ने आगे कहा कि सचिन ने पूरी दुनिया में देश का नाम काफी उंचे स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। अगर उनके साथ ही ऐसा बर्ताव किया जाएगा, तो आप लोग यह सोच भी कैसे सकते हैं कि लोग आकर राजसभा में बैठेंगे। सचिन आज कांग्रेस के इस बर्ताव से काफी निराश थे। वह अपनी जिंदगी में काफी व्यस्त रहते हैं और ऐसे में उनके पास और भी कई काम हैं, फिर भी वह बहुत देर तक वहीं पर खड़े रहे।
जया ने गुस्से में आगे कहा हैं कि फिर कहा जाता है कि सचिन संसद नहीं आते। मैं कहती हूं अच्छा हुआ नहीं आते हैं, इस तरह से बर्ताव करना है अगर उनके साथ, तो उनके आने का ही क्या फायदा वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। साधारण व्यक्ति होते तो सोचते। आपने उनको नॉमिनेट किया, आप लोगों ने ही उन्हें भारत रत्न दिया और आप उनको बोलने का मौका नहीं दे रहे हैं। 5 मिनट रुक जाते तो क्या हो जाता।
अब अगर देखा जाए तो कांग्रेस ऐसी ही बच्चों वाली हरकते करने की वजह से कभी सत्ता में नहीं आ सकती। और हमारे देश को शायद ऐसा नेता तो बिलकुल भी नहीं चाहिए जो किसी क4ा सम्मान करने भी न जानता हो। कांग्रेस के लिए किसी के बोलने से ज्यादा जरूरी अपनी रीजनीति हो चली है ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री बनाना सबसे बड़ी बेवकूफी होगी।