samajwadi party sansad accept buddha dharma

सपा सांसद प्रवीण निशाद ने अपनाया बौद्ध धर्म

2019 चुनाव जैसे जैसे नजदीक आते जा रहे है वैसे ही हर चुनावी पार्टी अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुई है। हाल ही में यूपी उपचुनाव में सपा ने बसपा के साथ मिलकर अपनी जीत का परचम लगरा दिया। अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि उत्तरप्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट से नवनिर्वाचित सांसद प्रवीण निषाद ने सपरिवार हिन्दू धर्म छोड़ कर बौद्ध धर्म अपना लिया है।

बता दें गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा के हारने के बाद से आरएसएस और भाजपा के लोगो ने यह बात बोलना शुरू कर दिया था, कि यह हार सिर्फ भाजपा की ही नहीं बल्कि सारे हिन्दूओं की हार है। भाजपा और आरएसएस की इस बात से यह साफ है कि पिछडी जाति के लोग हिन्दू नहीं हैं। इन्हीं सब बातों से आहत होकर गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव जीतकर संसद पहुचने वाले नवनिर्वाचित सासंद प्रवीण निषाद ने कुशीनगर के पूज्य भन्ते भन्ते उत्तरानन्द से स्वेच्छा से अपने पिता डा. संजय निषाद के साथ सपरिवार बौद्ध धम्म ग्रहण कर लिया।

देखने वाली बात तो यह है कि उपचुनाव में हार के बाद भी बीजेपी की आंखों में शर्म नजर नहीं आ रही है और वह अभी भी विवादित बयान देकर हिदुत्व पर सवाल खड़े कर रहे है और साथ ही जाती के नाम पर भी भेदभाव करते हुए दिख रहे है।

mayavati celebrates 1yr of yogi with this name

यूपी के सीएम योगी का 1 साल पूरा, मायावती ने दिया 1 साल बुरी मिसाल का नाम

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का एक साल पूरा हो गया है। योगी सरकार के एक साल होने पर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इसे ‘एक साल-बुरी मिसाल’ का नाम दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यही कारण है जनता ने गोरखपुर और फुलपूर उपचुनाव में उन्हें सबक सिखा दिया है और सरकार को जीरो अंक दिया है।

सीएम योगी को कठघरे में खड़ा करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा प्रदेश की आमजनता से घोर वादाखिलाफी, उसे केवल लच्छेदार बातों में फुसलाने व धार्मिक उन्मादों में बहकाने की भूल करने का ही नतीजा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी परंपरागत लोकसभा सीट भी गंवानी पड़ी है। इससे पहले शहरी निकाय के चुनाव में भी वो अपने मठ की सीट पर चुनाव हार गए थे।

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि- योगी की सरकार द्वारा एक साल के अंतरगत सर्वसमाज के गरीबों, मजदूरों, बेरोजगारों और आम जनता के हित व कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय कर्मकाण्ड व पूजा पाठ में ज्यादा ध्यान दिया गया। योगी को राजधर्म का पाठ पढ़ाते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि जनता के हित के लिए सही नीयत व निष्ठा भाव से काम करना ही असली पूजा व सच्चा राजधर्म है।

 

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एससी और एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एससी और एसटी एक्ट को लेकर एक काफी बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय के मुताबिक अब अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति एक्ट के तहत सरकारी कर्मचारियों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। इसी के साथ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ नए दिशा-निर्देश भी जारी किए। इसमें कोर्ट ने साफ कहा है कि इस एक्ट के तहत दर्ज शिकायत पर सरकारी कर्मचारी/अफसर को फौरन अरेस्ट नहीं किया जाएगा। अदालत ने मामले की जांच पहले डिप्टी सुपरिटेंडेंट रैंक के किसी अफसर से करवाने का आदेश दिया है।

बता दें कि कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक अब ऐसी कोई भी शिकायत होने पर सबसे पहले आरोपों की जांच की जाएगी। इस मामले में अब गिरफ्तारी से पहले आरोपी को अग्रिम जमानत भी दी जा सकती है। ऐसे मामलों में पहले अग्रिम जमानत की कोई व्यवस्था नहीं थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने की। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि- “इस एक्ट के तहत सरकारी अफसर के खिलाफ किसी भी शिकायत की जांच की जानी जरूरी है। इसे डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के नीचे के रैंक का अफसर नहीं करेगा। और फिर अधिकृत अफसर की मंजूरी के बाद ही सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी की जा सकती है।”  यह फैसला सुप्रीम कोर्ट का तब आया जब कोर्ट को लगा इस एक्ट का दुरुपयोग किया जा रहा है।

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अगर EVM के बिना चुनाव होते तो और बड़ी होती सपा की जीत

हाल ही में यूपी उपचुनाव में सपा की जीत हुई और शायद ये जीत सिर्फ बसपा सुप्रीमो मायावती के समर्थन से ही संभव हो पाई। लेकिन इस जीत के बाद भी समाजवादी पार्टी के चीफ और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि ये गरीब तबके की बड़ी जीत है और इस जीत का एक बड़ा राजनीतिक संदेश जाएगा। साथ ही उन्होंने सीएम योगी पर तंज कसते हुए कहा ‘फूलपुर में फूल मुरझा गया, घमंड टूटा’, उम्मीद है कि अब भाषा बदल जाएगी।

बता दें कि उन्होंने कहा कि ईवीएम में भी धांधली हुई और अगर धांधली न होती तो जीत और भी बड़ी होती। अखिलेश ने कांग्रेस के बारे में कहा कि कांग्रेस से हमारे संबंध अच्छे हैं और बने रहेंगे।

साथ ही उन्होंने कहा सपा सरकार ने अस्पताल बनाने शुरू किए। साथ ही पार्टी की सरकार ने अस्पताल की घोषणा की थी जोकि अभी भी नहीं बना है। अखिलेश ने कहा कि युवाओं पर ज्यादा भार है और उनमें ऊर्जा भी ज्यादा है। आने वाली पीढ़ी का भविष्य बेहतर बनाने के लिए काम करना चाहिए और ज्यादा मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये जीत हमारी नहीं है बल्कि लाखों लोगों की मदद से ये जीत मिली है।

 

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नहीं रहें दिवगंत वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग, शोक में डूबा संसार

आज सुबह से बहुत ही दुखद खबर दुनिया में चल रही है। शायद इस खबर से यह बात सिद्ध होती है कि दुनिया को आज सबसे बड़ा घाटा हुआ है। आपको बता दें कि दुनिया के जाने-माने भौतिक वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग आज हम सभी को अलविदा कह गए। वह 76 साल के थे। हॉकिंग के गुजरने की बात की जानकारी आज सुबह ही उनके परिवार ने दी है। वैज्ञानिक ने अपनी अंतिम सांस अफने घर में ली। उनके बच्चों लूसी, रॉबर्ट और टिम ने इस बारे में आधिकारिक बयान जारी किया।

उनका कहना है कि, “हम पिता के जाने से बेहद दुखी हैं। वह महान वैज्ञानिक थे और असाधारण इंसान थे, जिनका काम और विरासत आने वाले सालों में भी जाना जाएगा।” हॉकिंग ने बिग बैंग सिद्धांत और ब्लैक होल को समझने में खास योगदान दिया है। यही कारण है कि उन्हें अमेरिका के सबसे उच्च नागरिक सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उनकी ब्रह्मांड के रहस्यों पर किताब ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ भी दुनिया भर में काफी मशहूर हुई थी।

अधिक जानकारी के लिए आपको बता दें कि हॉकिंग मूल रूप से ब्रिटेन के रहने वाले थे। मीडिया खबरों के मुताबिक, वह मोटर न्यूरॉन बीमारी से पीड़ित थे। जिसकी वजह से उनके दिमाग को छोड़कर शरीर के बाकी अंग काम नहीं करते थे। वह व्हीलचेयर पर रहते थे। फिर भी विज्ञान की दुनिया में वह अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे। एलबर्ट आइंस्टीन के बाद हॉकिंग दुनिया के सबसे महान सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी बने।

 

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यूपी के हापुड़ में दबंगों की गुंडागर्दी, दिव्यांग समेत 2 दलित युवकों को बांध कर मारा

उत्तर प्रदेश में मानवता को शर्मसार करने देने वाली एक काफी दर्दनाक घटना सामने आई है। मामला हापुड़ जिले के सिंभावली क्षेत्र के ढाना गांव का है । यहां 3 दबंग युवकों ने देवली गांव निवासी दिव्यांग समेत 2 दलित युवकों पर चोरी आरोप लगाते हुए पहले बंधक बनाया और फिर उनके मुंह में कपड़ा ठूंस कर उन्हें बेरहमी से मारा गया। इतनी ही नहीं दबंगों ने दिव्यांग युवक के एक हाथ का अंगूठा भी काट लिया। वह सभी इतने पर ही नहीं थमें उसके बाद दबंगों ने इस घिनौनी वारदात का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायलर भी कर दिया।

आपको बता दें कि हापुड़ जिले के देवली और ढाना गांव दोनों ही एक घिनौनी वारदात को लेकर काफी सुर्खियों में हैं। जानकारी के मुताबिक देवली गांव में कुछ दिन पहले एक युवती का पर्स चोरी हो गया था। इस मामले में युवती के रिश्ते के भाई और ढाना गांव के रहने वाले कपिल ने 2 अन्य युवकों भरत और नूतन के साथ मिलकर दलित समाज के दिव्यांग अनिल और रोहित पर चोरी का शक जताते हुए अपने घर में बंधक बना लिया। जहां दोनों को रस्सी से बांध कर छत से लटका दिया और उनकें मुंह में कपड़ा ठूंस कर कई घंटों तक लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा।

इतना ही नहीं इसके बाद दबंगों ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए दिव्यांग अनिल के बाएं हाथ का अंगूठा भी काट दिया। इस दौरान दोनों युवक मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन दबंगों के सामने किसी ने भी उन्हें छुड़ाने की कोशिश नहीं की। दबंगों ने अपनी इस शर्मनाक और क्रूरता वाली घटना की वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी।

इस मामले में पीड़ित दिव्यांग अनिल के परिजनों ने तीनों आरोपियों के खिलाफ थाने में केस दर्ज कराया। इसके साथ ही घायल अनिल को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया है। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने अभी तक 1 आरोपी को हिरासत में लिया है। पुलिस क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार मिश्रा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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अपने रक्तपात जैसे बयानों से धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले श्री श्री रविशंकर पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं?

देश की मौजूदा सरकार धार्मिक खाई पैदा करके अपना राजनीतिक उल्लू साधने की कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहती। इसलिए वो धार्मिक बयान देने वालों पर कार्रवाई ना करके  और उन मामलों पर मौन साधकर अप्रत्यक्ष रूप से उनका सहयोग ही करती है। आपको बता दें कि हाल ही में दिए गए श्रीश्री रविशंकर के कई बयान इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। चंद रोज पहले एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने एक किस्म की अंधकारमय भविष्यवाणी प्रस्तुत की कि अगर मंदिर मसले का समाधान जल्द नहीं किया गया तो भारत सीरिया बन सकता है।

अधिक जानकारी के लिए आपको बता दें कि सीरिया विगत कुछ वर्षों से गृहयुद्ध का शिकार है, जिसमें लाखों लोग मारे जा चुके हैं। उनका कहना था, ‘अगर अदालत मंदिर के खिलाफ निर्णय सुनाती है तो रक्तपात जरूर होगा। जैसे कि उम्मीद की जा सकती है कि इन ‘भड़काऊ बयान’ के लिए उनकी काफी भर्त्सना हुई और इस बात को मद्देनजर रखते हुए कि उनका यह बयान ‘संप्रदायों में तनाव’ को बढ़ावा दे सकता है, देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके खिलाफ पुलिस में शिकायतें भी दर्ज की गई है।

क्या श्रीश्री को पहले से पता था कि कोई कार्रवाई नहीं होगी? 

विचलित करने वाली बात तो यह हैं कि न ही बयान से उपजा गुस्सा और न ही पुलिस में किसी भी तरह की दर्ज शिकायत का अयोध्या मामले के इन ‘स्वयंभू’ मध्यस्थ कहे जाने वाले इस आध्यात्मिक गुरु पर कोई असर हुआ। इतना ही नहीं रिपोर्टरों से बात करते हुए उन्होंने अपने इसी विवादास्पद बयान को कई बार दोहराया। निश्चित ही वहां मौजूद किसी खबरनवीस ने उनसे यह पूछने की जुर्रत नहीं की कि क्या संविधान द्वारा तय मर्यादाओं का उल्लंघन या तयशुदा कानूनी विधानों की अनदेखी भी इसी दावे में शुमार की जा सकती है।

क्या श्रीश्री को यह नहीं पता होगा कि जहां तक ऐसे बयानों की बात है तो उनके बारे में कानून बिल्कुल स्पष्ट है। भले ही उनके अमल पर कोताही नजर आए, भारत के कानूनों के तहत धर्म के आधार पर दो समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाना एक आपराधिक कार्रवाई है।

संविधान के विरुद्ध है ये बयान 

इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि भारतीय दंड विधान की धारा, दंगा फैलाने की नियत से भड़काऊ कार्रवाई करने के लिए (धारा 153), धर्म के आधार पर दो समुदायों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने के लिए (धारा 153 ए), राष्ट्रीय एकता को बाधा पहुंचाने वाले वक्तव्यों, बयानों (धारा 153 बी), ऐसे शब्दों का उच्चारण जिनके जरिए दूसरे व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को आहत करना (धारा 298), सार्वजनिक शांति व्यवस्था को बाधित करने वाले वक्तव्य (धारा 505 (1), बी और सी) और अलग-अलग तबकों के बीच नफरत, दुर्भावना और दुश्मनी पैदा करने वाले वक्तव्य (धारा 505/2)।

भारतीय दंड विधान की सेक्शन 153 ए या बी के तहत किसी व्यक्ति द्वारा किया जा रहे उल्लंघन के खिलाफ कार्यकारी दंडाधिकारी को कार्रवाई शुरू करने का पूरा अधिकार है। अगर हम आध्यात्मिक गुरु के बयान को बारीकी से देखेंगे तो पता चलेगा कि अगर उनके खिलाफ दायर शिकायतों को प्रथम सूचना रिपोर्टों की शक्ल प्रदान की गयी तो उनके लिए कानूनी पचड़ों से बच निकलना आसान नहीं रहेगा।

कानून के राज को चुनौती दे रहे हैं रविशंकर 

अपने साक्षात्कार में रविशंकर का यह दावा करना कि अगर सर्वोच्च न्यायालय हिंदुत्ववादियों की मांग को खारिज करता है तो हिंदू हिंसा पर उतर आएंगे, इसके जरिए न केवल श्रीश्री रविशंकर कानून के राज को चुनौती दे रहे थे बल्कि संवैधानिक सिद्धांतों पर भी कई बड़े-बड़े सवाल खड़ा कर रहे थे- जिनके सामने जाति, धर्म, जेंडर, नस्ल, समुदाय आदि आधारों पर किसी भी तरह का भेदभाव संभव नहीं है।

साथ ही बताते चले कि इन दिनों उस मामले की सुनवाई आला अदालत कर रही है जिसने यह तय किया है कि उसे एक ‘जमीन के विवाद’ के तौर पर देखेगी और इसकी अगली सुनवाई 14 मार्च को की जाएगी।

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किसानों का बड़ा प्रदर्शन, मुंबई की कई जगह दिखी लाल

किसानों की हालत इस देस के किसी बी कोने में सही नहीं है। रोज न जाने कितने किसान आत्महत्या कर रहे है और न जाने कितने किसान भूख से मर रहे हैं लेकिन सरकार को किसी से कोई मतलब नहीं है। उन्हें तो सर्फ अपनी सत्ता से प्रेम है। अब तो किसान इतना परेशान हो गया है कि उसे अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

आपको बता दें कि बिना किसी शर्त के ऋणमाफी की मांग करते हुए महाराष्ट्र के किसान सोमवार को सुबह ही दक्षिणी मुंबई के आजाद मैदान में जमा हो गए थे। पिछले छह दिन से तपती धूप में 180 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद ये किसान मुंबई के आजाद मैदान पहुंचे। किसानों ने विधानसभा परिसर को घेरा और ऋणमाफी के अलावा किसान, आदिवासी किसानों को वनभूमि हस्तांतरण करने की भी मांग कर रहे थे। इनके हाथों में लाल झंडा होने की वजह से मुंबई के कई इलाके पूरी तरह से लाल नजर आए।

इस बीच किसानों के मुंबई पहुंचने पर मुंबई के डब्बावाले भी आंदोलनकारी किसानों का समर्थन भी किया था। स्थानीय लोगों के साथ मिलकर ये डब्बावाले किसानों को खाना-पानी दे रहे थें। दादर और कोलाबाड के बीच डब्बावाले खाना और पानी जुटाकर किसानों में बांट रहे थें। दूसरी ओर किसान प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि किसानों की समस्याओं को हल करने की दिशा में सरकार काम कर रही है। मोर्चे के पहले दिन से सरकार किसानों से बात कर रही है। सरकार के एक मंत्री गिरीश महाजन उनसे इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहे हैं।

congress release the list of rajyasabha members

कांग्रेस ने जारी की 9 राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची, हैरान हुए सब

राज्यसभा के चुनाव की दौड़ में कांग्रेस पार्टी ने अपने 9 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में कई नाम ऐसे भी हैं जो चौंकाने वाले हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिन लोगों को राज्यसभा का टिकट थमाया है, उनमें प्रोफेशनल, पत्रकार, वकील, पिछड़े वर्ग, दलित कवि, ब्राह्मण, मुसलमान और पार्टी के दो लॉयल कार्यकर्ताओं को टिकट दिया गया है। कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक से जिन 3 नेताओं को टिकट थमाया है, उनमें जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष नासिर हुसैन, दलित कवि एल. हनुमंथिया और वोक्कालिगा लीडर जी.सी चंद्रशेखर के नाम फाइनल किए गए हैं।

गुजरात से कांग्रेस ने नारायण भाई राठवा और महिला उम्मीदवार आमि याग्निक पर अपना दांव पेश किया है। नारायण भाई राठवा यूपीए-1 की सरकार में रेल राज्य मंत्री थे, लेकिन 2014 का लोकसभा चुनाव वह हार गए थे। याग्निक मीडिया पैनलिस्ट हैं और इसके साथ ही पेशे से एक वकील हैं। झारखंड से पार्टी ने एक बार फिर धीरज साहू पर दांव लगाया है। धीरज साहू इससे पहले भी दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। कांग्रेस और जेएमएम का झारखंड में गठबंधन हो गया है और धीरज साहू की जीत में कोई बाधा नहीं है।

साथ ही आपको बता दें कि मध्य प्रदेश से कांग्रेस ने पिछड़े वर्ग के नेता और पूर्व मंत्री रामजी पटेल को टिकट दिया है। रामजी पटेल काफी वक्त से राजनीति में हाशिए पर चल रहे थे और एक साधारण कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी के अंदर काम कर रहे थे।