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 मायावती के भाई को राज बब्बर से मिलना पड़ा, जानें क्या है वजह?

बसपा द्वारा सपा को यूपी के उपचुनाव में समर्थन देने के बाद क्यास लगाए जा रहे थे कि बसपा, सपा में गठबंधन होगा। लेकिन इस बात को बसपा ने सिरे से नकार दिया था। कि वह सपा के साथ कोई गठबंधन नहीं करेंगी। जिसके बाद अब बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बसपा प्रमुख मायावती के भाई आनंद कुमार और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के बीच मुलाकात की खबर सामने आई है। बता दें इस मुलाकात की खबर के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

यह मुलाकात नोएडा के एक जाने-माने उद्योगपति की पहल पर हुई है। इस मुलाकात को बेहद गोपनीय रखा गया था। लेकिन मामला मीडिया में आ गया। राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं।  बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के पीछे 2019 के लोकसभा चुनाव हैं। संभव है कि बसपा आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सकती है। शायद यही वजह है कि उसने सपा को अपना समर्थन उप चुनाव तक ही दिया है।

बता दें इस मुलाकात को उत्तर प्रदेश राज्यसभा के चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस चुनाव में बसपा को अपने उम्मीदवार भीमराव अम्बेडकर को जिताने के लिए सपा के अलावा कांग्रेस के वोटों की भी जरूरत होगी और शायद इसलिए ही बसपा उपाध्यक्ष आनंद कुमार और राज बब्बर मिले होंगें। हालांकि इस मुलाकात के पीछे की असली वजह तो अब तक पता नहीं चल पाई है। मुलाकात के पीछे की वजह को वक्त आने पर ही पता चल पाएगी।

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सवालों के घेरे में यूपी पुलिस, जानें क्या है वजह?

यूपी पुलिस द्वारा पिछले दिनों किए गए 4 एनकाउंटर की जांच उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग  ने शुरू कर दी है। बता दें  एनकाउंटर में मारे गए लोगों के परिजनों ने इन एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की थी। बताया जा रहा है कि  पिछले साल 20 मार्च से लेकर अब तक यूपी पुलिस करीब 43 कथित आरोपियों को एनकाउंटर में ढेर कर चुकी है। इनमें से 10 का एनकाउंटर तो इसी साल किया गए हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने जिन 4 मामलों की जांच शुरू की है। मानवाधिकार आयोग का कहना है कि चारों एनकाउंटर में यूपी पुलिस ने एक जैसी ही एफआईआर दर्ज की हुई है। एफआईआर के मुताबिक, संदिग्ध मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। एक पुलिस टीम ने चेकिंग के दौरान उन्हें रोकना चाहा, इसके बाद संदिग्धों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इसके जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें संदिग्ध की मौत हो गई और उसका एक साथी भागने में सफल हो गया।

खास बात है कि इन मुठभेड़ों में घायल पुलिसकर्मी अगले ही दिन डिस्चार्ज भी हो गए, साथ ही एनकाउंटर में मारे गए संदिग्धों के साथियों की अभी तक भी पहचान नहीं हो पायी है। उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार ने इटावा और आजमगढ़ के जिलाधिकारियों से इन चारों एनकाउंटर की रिपोर्ट मांगी गई है।