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“कांग्रेस और बीजेपी चोर-चोर मौसरे भाई ही लगते है” मायावती ने ऐसा क्यों कहा

बीएसपी प्रमुख मायावती ने कोयला क्षेत्र का निजीकरण करने को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। बता दें 24 फरवरी को दिल्ली में बीएसपी के केंद्रीय कार्यालय से जारी विज्ञप्ति में मायावती ने कहाकि मोदी सरकार द्वारा राष्ट्रीय संपत्ति कोयला का भी निजीकरण करके प्राइवेट कंपनियों को कोयला खदानों में उत्पादन और इस्तेमाल की अनुमति देने का फैसला वास्तव में‘धन्नासेठों के तुष्टिकरण’ की एक और नीति है।

मायावती ने कहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी मुट्ठीभर बड़े-बडे पूंजीपतियों और धन्नासेठों के हित लगातार काम किए जा रहे हैं, परंतु देश के सवा सौ करोड़ गरीबों, मजदूरों,किसानों,युवा बेरोजगारों और  अन्य मेहनतकश लोगों से किए गए ‘अच्छे दिन’के वादे आदि क्यों नहीं पूरे किए जा रहे हैं। जबकि इनमें ही देश का असली हित निहित है।

उन्होंने ये भी कहा कि मोदी सरकार के लगभग 4 वर्ष के कार्यकाल में देश की आम जनता ने यह महसूस कर लिया है कि देश की संपत्ति को लूटने और लुटाने के मामले में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों की सरकारें चोर-चोर मौसरे भाई ही लगते हैं, जो कि देशहित में अत्यंत ही घातक प्रवृति है।

अब देखना यह है कि विपक्ष इस बयान पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देती है।

भीख मांगना भी एक बड़ा रोजगार -आरएसएस नेता

13 फरवरी को इंदौर में “कलाम का भारत” विषय पर आयोजित एक बैठक के दौरान आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने एक बार फिर विवादित बयान देते हुए कहा की भीख मांगना भी देश के 20 करोड़ लोगों का रोजगार है, जिन्हें किसी ने रोजगार नहीं दिया उन लोगों को धर्म में रोजगार मिलता है, इंद्रेश कुमार का यह बयान एक ऐसे समय पर आया है। जब देश में PM मोदी के पकोड़े पर दिए बयान पर विपक्ष लगातार हमलावर है वही कार्यक्रम कार्यक्रम को संभोधित करते हुए इंद्रेश कुमार ने पीएम मोदी के बहुचर्चित पकौड़ा वाले बयान पर अपनी राय रखते हुए कहा की पकौड़े तलना देश के 15 करोड़ से ज्यादा लोगों का व्यवसाय है, और इसे छोटा काम नहीं समझना चाहिए और अगर कोई ऐसा समझता है तो ये बेहद दुखद है।

 

आपको बतादे जहां एक तरफ रोजगार के अवसर प्रदान न कर पाने के चलते केंद्र की मोदी सरकार बैकफुट पर है। तो वही आरएसएस ने नेता लगातार सरकार की मुश्किलें बढ़ाने का काम कर रहे है चाहे वह इंद्रेश कुमार का बयान हो या फिर हाल ही में सेना की तैयारी को लेकर संघ प्रमुख का बयान ही क्यों न हो।

अमित शाह की रैली को रोकने के लिए जाटों ने कसी कमर

15 फरवरी को हरियाणा  के जींद में अमित शाह की होने वाली बाइक रैली को लेकर ‘बवाल’ खड़ा हो गया है ,क्यों कि जाट समाज के लोगो ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेतृत्व में अमित शाह का विरोध करना शरू कर दिया है । रैली को रोकने के लिए समिति की तरफ से जींद में 750 ट्रैक्टरों का अभी तक रजिस्ट्रेशन हो चुका है. वहीं, अन्य जिलों में  रजिस्ट्रेशन की  प्रक्रिया चला रही है. बता दें कि जाट आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों की याद में 18 फरवरी को प्रदेश में बलिदान दिवस मनाया जा रहा है. जिसके चलते 15 फरवरी को जींद के 7 मुख्य रास्तों पर बच्चे और महिलाओं के साथ ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर जाट पहुंचेंगे.
आपको बतादे की प्रदेश सरकार ने करीब 85 मुकदमों को वापस ले लिया है मगर समिति इतने भर से मानने को तैयार नहीं है और साफ कर दिया है की अगर सरकार द्वारा उनकी सभी  मांगें नहीं मानी गईं तो शाह की रैली नहीं होने देंगे। वहीं, सरकार इससे अधिक मांगें मानने को तैयार नहीं दिख रही है। ऐसे में टकराव की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में हालात से निपटने के लिए आला अधिकारी सक्रिय हो गए हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने PM मोदी को किसानों,युवाओं के मुद्दे पर जमकर घेरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए भाषण पर पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा की पीएम नरेंद्र मोदी ने एक घंटे से अधिक समय तक भाषण दिया लेकिन राफेल डील पर एक शब्द तक नहीं बोला।बल्कि इसे राजनीतिक भाषण बताते हुए राहुल गाँधी ने किसानों,युवाओं के रोजगार के मुद्दों पर घेरते हुए कहा की मोदी जी अब प्रधानमंत्री बन चुके हैं, उन्हें सवालों के जवाब देने चाहिए ना की हमेशा विपक्ष पर आरोप लगाने चाहिए।वही उन्होंने कहा कि पीएम ने देश को एक साल में 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी, लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ है।गौरतलब है की राहुल गांधी राफेल विमान सौदे को लेकर मोदी सरकार पर न सिर्फ हमला बोला, बल्कि घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि सौदे  में कोई पारदर्शिता नहीं बरती है बल्कि मोदी सरकार ने राष्ट्रीय हित एवं सुरक्षा के साथ सौदा भी किया है।

 

वहीं लोकसभा में विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच अपने भाषण की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला था ।भाषण के दौरान विपक्षी सांसद नारेबाजी करते रहे जबकि मोदी ने कहा कि सदन में सार्थक चर्चा हुई है।

अरबपति इंजीनियर यादव सिंह पर सीबीआई का शिकंजा, करोड़ों रुपए हुए बरामद

अरबपति इंजीनियर यादव सिंह ने पैसे कमाने के लिए सभी नियम कानून को ताक पर रख दिया था और आज वही दौलत उसकी मुसीबत बन गई  है। जी हाँ नॉएडा का ये पूर्व इंजीनियर आज सीबीआई के शिकंजे में है आपको बता दे कि पिछले दिनों सीबीआई ने यादव सिंह की चार्जशीट में बड़े-बड़े खुलासे किए गए थे और इन खुलासों से पता चलता है कि गले तक भ्रष्टाचार में डूबे यादव सिंह ने किस तरह से पानी की तरह पैसा बहाया है। सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक, 2004 से 2014 के बीच में यादव सिंह ने करीब 11 करोड़ रुपए अपने ऐशो-आराम और पार्टीज में खर्च किए है और सीबीआई जांच में अब तक पाया गया है कि यादव सिंह के पास 23 करोड रुपए की अघोषित संपत्ति है।  इसके अलावा करीब 44 प्लॉट्स जो कि उसके परिवार के तमाम मेंबर्स के नाम हैं। जानकारी के मुताबिक, यादव सिंह ने अपनी बेटी करुणा सिंह की शादी में सन 2008 में नोएडा का सेक्टर-21 स्टेडियम पूरा बुक किया था और करीब 5000 गेस्ट्स के  लिए करोड़ों रुपए का डिनर आयोजित किया था और इसके अलावा नोएडा की ही तमाम ज्वेलरी की दुकानों से करोड़ों की खरीदारी की गई थी।यादव सिंह के यहा छापे में करोड़ों के जेवरात भी बरामद हुए थे और ऐसे में हम खुद देख सकते है कि जहा एक तरफ़ ईमानदार आदमी  अपनी बेटी की शादी के लिए अपनी ज़िन्दगी भर की कमाई उस शादी में लगा देता है और वही दुसरी तरफ एक इंसान भ्रष्टाचार के दम पर बेटी की शादी पर करोड़ो खर्च कर देता है।

 

 

क्या शहजाद पूनावाला कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी में कमल खिलाने चाहते हैं?

कांग्रेस के युवा नेता शहजाद पूनावाला के पिछले बयान में वो अपनी ही पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी के विपक्ष में अध्यक्ष के चुनाव में खड़े होने की बातें कर रहे थे और अब ऐसे में शहजाद ने राहुल गांधी पर एक बार फिर से निशाना साधा था शहजाद पूनावाला ने कहा है कि कांग्रेस राहुल के खिलाफ डमी उम्मीदवार उतारेगी जिससे वे आसानी से जीत जाए .उन्होंने कहा है मेरी पार्टी के इतिहास में ये सबसे काला दिन है.. और इसके बाद  शहजाद ने वंशवाद का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी पर हमला बोला . इतना ही नही शहजाद ने ट्वीट पर भी लिखा कि  ‘’ पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया है कि वंशवाद के सलाहकार शहजादा के खिलाफ डमी कैंडिडेट उतारने की सोच रहे हैं. वाकई!! इतना नाटक क्यों?’’ उन्होंने आगे लिखा कि  ‘’एक शुभचिंतक ने सलाह दी है कि शहजाद आज कांग्रेस दफ्तर पहुंचकर दूसरे सफदर हाशमी मत बनना.‘’ बता दें कि कल गुजरात में रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहजाद पूनावाला के बयान का जिक्र करते हुए कहा था, ”शहजाद नाम के एक युवक ने कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को लेकर अपनी आवाज उठाई थी, शहजाद महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेता है. कांग्रेस में उस युवक की आवाज दबाने की कोशिश हुई और सोशल मीडिया ग्रूप से उसे निकाल दिया गया.” पीएम ने कहा, ”जहां आंतरिक लोकतंत्र नहीं है वहां आम जनता के लिए काम नहीं हो सकता. इस युवक ने बड़ी हिम्मत का काम किया है, लेकिन दुख की बात है की ऐसा कांग्रेस में हमेशा होता है.” पीएम मोदी के इस बयान के बाद शहजाद ने उनको शुक्रिया भी कहा. अब ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा शेहजाद का ज़िक्र करना और पीएम मोदी को धन्यवाद शेहजाद द्वारा कहना एक सीधा सीधा संकेत देता दिख रहा है कि क्या शेहजाद पूनावाला कांग्रेस का हाथ को छोड़ कर बीजेपी में कमल खिलाने चाहते है

नांदेड़ नगर निकाय चुनाव में काग्रेंस की बड़ी जीत, बीजेपी को मिली छह सीट

मुंबई: नांदेड़ नगर निकाय चुनाव में काग्रेंस ने महारत जीत हासिल करते हुए 81 में से 73 सीटों पर अपनी जीत का परचम लहराया।

हालांकि बीजेपी ने इस चुनाव में छह सीटें जीती साथ ही अन्य दल शिवसेना ने इसमें एक सीट हासिल की।

आपको बता दें, नांदेड़ कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष अशोक चव्हाण का गढ़ है।

दरअसल इस चुनाव भाजपा ने सत्ता पर कब्जा जमाने की बहुत कोशिश की लेकिन अफसोस वह अपने मक़सद में कामयाब नहीं हो पायी। केवल और केवल छह सीटों पर ही सिमट कर रह गयी।

राज्य निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि तकनीकि कारणों से कल चार सीटों के नतीजे रोक कर रखे गए और आज घोषित किए गए है।

जानकारी के लिए बता दें, चुनाव के नतीजों से पहले चव्हाण ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में छेड़छाड़ ना होने को पार्टी की जीत का श्रेय दिया था और घोषणा कर डाली कि भाजपा की ‘वापसी यात्रा’ शुरू हो गई है।

तो वही दूसरी तरफ भाजपा की नई सहयोगी और महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष (एमएसपी) नेता नारायण राणे ने भाजपा नेतृत्व को आत्मावलोकन करने की सलाह देते हुए कहा कि नांदेड़ नगर निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री द्वारा कई चुनावी रैलियां किए जाने के बावजूद उसका प्रदर्शन इतना खराब क्यों रहा ?

साथ ही उन्होनें इस बात को सिरे से नकार दिया कि इन परिणामों का असर 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा।

हालांकि दो दशक पहले नांदेंड नगर निकाय बनने के बाद से यहां कांग्रेस का ही शासन रहा है।