जेएनयू छात्रसंघ के लिए जारी हुआ सर्कुलर

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों ने अनिवार्य उपस्थिति करने के फैसले पर  संस्थान के प्रशासनिक खंड (ऐड-ब्लॉक) के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था जिसके बाद  जेएनयू छात्रसंघ की केंद्रीय समिति के सदस्यों पर 10,000-10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

बता दें जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर कौशल कुमार द्वारा जारी किए गए सर्कुलर में जेएनयू  छात्रसंघ की अध्यक्ष गीता कुमारी, उपाध्यक्ष सिमोन ज़ोया ख़ान, महासचिव डुग्गीराला श्रीकृष्ण और संयुक्त सचिव सुभांशु सिंह को 10 दिन के अंदर जुर्माने का भुगतान करने को कहा गया है।

छात्रसंघ अध्यक्ष गीता कुमारी के नाम जारी सर्कुलर में कहा गया है कि “प्रॉक्टर द्वारा की गई जांच में गीता कुमारी ने ऐड-ब्लॉक पर ‘हाज़िर जनाब’ नाम के कार्यक्रम का आयोजन किया था। जिसमें गीता कुमारी को  ऐड-ब्लॉक की सीढ़ियों के पास विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने में दोषी पाया गया है। यहां पर प्रदर्शन उच्च न्यायालय के फैसले का उल्लंघन है”। इसलिए  जुर्माना लगाया गया है।

लव जिहाद पर शहला राशिद का बड़ा बयान

अंकित सक्सेना की मौत और लव जिहाद जैसे घटनाओं के बाद शहला राशिद ने मुस्लिम लड़कियों के ऊपर बड़ा बयान दिया है शहला कहती है कि मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों को गैर मुस्लिम लड़को से शादी और प्रेम करने की आजादी होगी । तभी अंकित सक्सेना की मौत जैसी हालात नहीं बनेंगे।

अंग्रेजी अखबार के मुताबिक शहला राशिद ने कहा है कि “अगर हम प्यार के लिए अपने दरवाजे नहीं खोलेंगे तो हम नफरत की आंधी में जलना डिजर्व करते हैं। आज के वक्त में महिलाओं को समुदायों की आस्था और परंपरा के नाम पर बंधक बनाकर रखा जा रहा है। यह ऐसा धर्म है जो आदमियों की सहूलियत के आधार पर चलता है”।

बता दें शहला राशिद ने अपने फेसबुक पर भी लिखा कि जिस तरह से बालिग महिला हादिया को शफीन को चुनने का अधिकार है , उसी तरह दूसरी बालिग मुस्लिम महिला को अंकित सक्सेना को चुनने का अधिकार है। यह अधिकार हमारे संविधान से मिला है न कि मुस्लिम और हिंदू कानूनों से।

जेएनयू में फिर से लगे आजादी के नारे, जानिए वजह

एक बार फिर से जेएनयू कैंपस में रात भर सैकड़ों की संख्या में छात्रों ने छात्र आजादी के नारा लगाते रहे। हांलाकि इस बार आजादी के नारे की वजह अलग थी। यह नारे दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में रविवार रात लगाए गएं।  इन नारों को लगाने पीछे की वजह यह बताई गई कि जेएनयू के छात्र 75 फीसदी उपस्थिति को अनिवार्य बनाने का विरोध कर रहे हैं।

बता दें दिसंबर 2017 में जेएनयू प्रशासन ने एक सर्कुलर जारी कर कहा था कि विश्वविद्यालय प्रशासन सभी कोर्स के लिए 75 फीसदी उपस्थिति को अनिवार्य करने जा रहा है। जेएनयू के छात्र संगठनों ने प्रशासन के इस कदम को अनावश्यक बताया है। इस मुद्दे को लेकर पिछले एक महीने से आंदोलन चल रहा है। रविवार रात को बड़ी संख्या में कड़ाके की ठंड की ठंड में छात्र-छात्राएं जेएनयू के प्रशासनिक भवन के सामने जुट गये। इस दौरान छात्र-छात्राओं के हाथों में मशालें भी थीं। इस विरोध में यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। छात्रों ने  “हम लेके रहेंगे आजादी, तुम कुछ भी कर लो, हम लेके रहेंगे आजादी, हम छीन के लेंगे आजादी, हम कह के लेंगे आजादी” जैसे नारे लगाते रहे। इसके अलावा, ‘बायकॉट, बायकॉट जैसे नारे भी लगाये।”

छात्रों के प्रदर्शन के बाद जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने ट्वीट कर कहा है कि “कुछ छात्र लगभग महीने भर से प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि उपस्थिति के मुद्दे को सुलझाने के लिए JNUSU के नेता विश्वविद्यालय प्रशासन से लगातार बात कर रहे हैं”। प्रमोद कुमार ने कहा कि “कुछ छात्र अपने सहपाठियों को क्लासरूम बिल्डिंग जाने से रोक रहे हैं और स्कूल भवन का रास्ता बंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के इस कदम की वजह से बाकी छात्रों, बीमार बच्चों और यूनिवर्सिटी आए गेस्ट को गंभीर परेशानी हो रही है।

वही कुछ छात्रों ने रात को प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन में तोड़ फोड़ भी की थी। जिसपर रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने चेतावनी दी है कि अगर छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा तो उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी।