भीख मांगना भी एक बड़ा रोजगार -आरएसएस नेता

13 फरवरी को इंदौर में “कलाम का भारत” विषय पर आयोजित एक बैठक के दौरान आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने एक बार फिर विवादित बयान देते हुए कहा की भीख मांगना भी देश के 20 करोड़ लोगों का रोजगार है, जिन्हें किसी ने रोजगार नहीं दिया उन लोगों को धर्म में रोजगार मिलता है, इंद्रेश कुमार का यह बयान एक ऐसे समय पर आया है। जब देश में PM मोदी के पकोड़े पर दिए बयान पर विपक्ष लगातार हमलावर है वही कार्यक्रम कार्यक्रम को संभोधित करते हुए इंद्रेश कुमार ने पीएम मोदी के बहुचर्चित पकौड़ा वाले बयान पर अपनी राय रखते हुए कहा की पकौड़े तलना देश के 15 करोड़ से ज्यादा लोगों का व्यवसाय है, और इसे छोटा काम नहीं समझना चाहिए और अगर कोई ऐसा समझता है तो ये बेहद दुखद है।

 

आपको बतादे जहां एक तरफ रोजगार के अवसर प्रदान न कर पाने के चलते केंद्र की मोदी सरकार बैकफुट पर है। तो वही आरएसएस ने नेता लगातार सरकार की मुश्किलें बढ़ाने का काम कर रहे है चाहे वह इंद्रेश कुमार का बयान हो या फिर हाल ही में सेना की तैयारी को लेकर संघ प्रमुख का बयान ही क्यों न हो।

जाट मुस्लिम एकता की कवायद में जुटे चौधरी अजित सिंह

राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह ने मुज़्ज़फरनगर में पार्टी कार्यकर्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि भाजपा ने यहां साजिश रचकर दो समुदायों को लड़ाया और सत्ता हासिल की। आपको बता दे 2013 में हुए  मुजफ्फरनगर दंगे के बाद वेस्ट यूपी में जाट और मुस्लिम समीकरण पूरी तरह बिखर गया था जिस का सीधा सीधा फायदा  2014 के आम चुनाव  बीजेपी को हुआ था। और  बाकी सभी दल यहां धराशायी हो गए थे। तो वही अब 2019 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए  मंगलवार को रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह अपने दो दिवसीय प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत दिल्ली से सरकुलर रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर पहुंचे। उन्होंने पार्टी के नवनिर्मित भवन के साथ ही साथ चौधरी चरण सिंह हॉल का भी लोकार्पण किया।

चौधरी अजित सिंह ने अपने पूरे  मुज़्ज़फरनगर दौरे के दौरान बीजेपी पर जमकर निशाना साधा और  कहा कि भाजपा फिर से दंगा कराने की फिराक में है, ऐसे में  दंगा रोकने की ताकत यदि किसी में है तो वो रालोद  है। सम्प्रदायिकता के आधार पर सत्ता में पहुंचने का आरोप लगाते हुए चौधरी अजित सिंह ने कहा की जिस जिले में 1947 में बंटवारे के दौरान व  1992 के बाबरी कांड के बाद भी दंगे नहीं हुए वहां भी  भाजपा ने साजिशन दंगा करा दिया जिससे गांवों का पूरा सामाजिक ताना बाना छिन्न भिन्न हो गया। जिसे अब फिर से खड़ा करने की जरूरत है और राष्ट्रीय लोकदल हर प्रयास कर रहा है और करेगा।

मोहन भागवत पर तेजस्वी यादव का बड़ा बयान

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को चुनौती दी है और कहा है कि अगर हिम्मत है तो वो संघ के स्वयंसेवकों को डोकलाम भेजें। बता दें तेजस्वी यादव का यह बयान मोहन भागवत के उस बयान के बाद आया है। जिसमें भागवत ने कहा था कि “सेना को युद्ध के लिए तैयार होने में छह महीने लग सकते हैं लेकिन संघ के कार्यकर्ता तीन दिन में ही तैयार हो सकते हैं”।

तेजस्वी यादव ने इसी पर प्रतिक्रिया जताते हुए ट्विटर पर लिखा है “मोहन भागवत में हिम्मत है तो डोक़लाम में भेज दे संघियों को। क्यों बिल में छुपे है? चीनी हमारे देश में घुसे हुए है। पाकिस्तानी प्रतिदिन हमला करते है। सेना और सैनिकों का अपमान बंद कर अपनी निक्कर गैंग को वहाँ भेजे। थूक के पकौड़े ना उतारे”।

बता दें तेजस्वी इतने पर ही नहीं रूके और उन्होंने दुबारा से दूसरा ट्वीट कर लिखा “किसी एक संघी का नाम बताओ जो सीमा पर शहीद हुआ हो या उसके परिवार से कोई शहीद हुआ हो। सेना का अपमान करना बंद करों। संघियों का देश को आज़ाद कराने में नहीं ग़ुलाम रखने में योगदान था”।

तेजस्वी के ट्वीट पर #ApologiseRSS पर कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है। एक यूजर ने लिखा है “आप की भाषा बता रही है की आप अनपढ़ हो और अनपढ़ो जैसी बात भी करते हो। मर्यादा तो आप के भाषा में होता नहीं है खैर मर्यादा तो आप के संस्कार में ही नहीं है। आप का ये ट्वीट बताता है की आप 9 वी फ़ैल ही नहीं बल्कि पूरी तरह से अनपढ़ भी हो”।

मायावती का बीजेपी पर हमला, मध्य प्रदेश के किसानों को बताया सबसे ज्यादा दुखी

बसपा प्रमुख मायावती ने रविवार को कहा कि मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और राज्य सरकार की प्राथमिकता किसान तथा मजदूर हितैषी होनी चाहिये लेकिन वहां भाजपा के शासनकाल में ख़ासकर किसान तथा खेतिहर मजदूर वर्ग के लोग सबसे ज़्यादा दुःखी और परेशान हैं। साथ ही मायावती ने मध्य प्रदेश में बसपा के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और पार्टी संगठन की तैयारियों तथा पूरे समाज में पार्टी के जनाधार को मज़बूत बनाने के साथ-साथ इसी वर्ष वहां होने वाले विधानसभा चुनाव को पूरी तैयारी के साथ लड़ने के संबंध में गहन चर्चा की। मायावती ने कहा कि जब किसान तथा खेतिहर मजदूर वर्ग के लोग अपनी मांगों के समर्थन में आन्दोलन के लिए सड़क पर उतरते हैं तो तब उन्हें सरकार अपनी मनमानी तरीके से चलाती है तथा जुल्म-ज्यादती का शिकार बनाती है, जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

भाजपा पर मायावती ने आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में भी भाजपा की सरकार खासकर यहां दलितों, पिछड़ों, मुस्लिम तथा अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि के साथ-साथ किसान वर्ग के साथ भी बर्बर व्यवहार कर रही है। इतना ही नहीं बल्कि आरएसएस की संकीर्ण, नफरत तथा विघटनकारी सोच को सर्वसमाज के लोगों पर जबरदस्ती थोपने के लिये संविधान तथा कानून को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया है। साथ ही कहा, मध्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी अच्छी नहीं है।

मायावती ने कहा कि राजस्थान की तरह ही दूसरे पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी भाजपा की जनविरोधी सरकार जाने वाली है। वहां होने वाले इस सुखद परिवर्तन में बसपा को अपनी ख़ास भूमिका निभानी है।

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टी. राजा का विवादित बयान, बताया असली हिंदू और नकली हिंदू में फर्क

ऐसा लगता है बीजेपी पार्टी के विधायक टी. राजा एक कट्टर हिंदूवादी हैं क्योंकि जिस तरह वो आए दिन अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में हैं उससे यही लगता है कि वो पूर्ण हिंदूवादी विचारधारा के व्यक्ति हैँ। अभी कुछ दिन पहले टी. राजा ने कासगंज हिंसा पर बयान दिया था कि अगर मुसलमानों के घर की तालाशी ली जाए तो उनके घर AK 47 निकलेंगी।

एक बार फिर हैदराबाद से विधायक टी. राजा सिंह ने बयान दिया है कि “अगर आप RSS की तरफ से आयोजित रोजाना बैठक या ‘शाखा’ में हिस्सा नहीं लेते तो आप असली हिंदू नहीं है,  उन्होंने यह विवादित बयान मध्य प्रदेश में बड़ी रैली को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने आगे कहा देश के हर नागरिक को अपने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ का जयकार करना चाहिए और जो ऐसा नहीं करते उन्हें ‘देश छोड़ देना चाहिए।

मीडिया खबरों के मुताबिक, टी. राजा ने कहा कि “RSS एक ऐसी ‘फैक्ट्री’ है जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे ‘आइकन’ निकलते हैं। बता दें मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने है। तो ऐसे में अटकले लगाई जा रही है कि ये आने वाले चुनावों की तैयारी में खेली गई राजनीति है। अब देखना यह है कि आने वाले चुनाव पर इस बयान का कितना असर पड़ता है और चुनाव परिणाम क्या निकलते है।

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बजट के बाद भड़के बीजेपी के सगंठन, देश भर में करेंगे विरोध !

साल 2018 -2019 का बजट कल संसद में पेश किया गया। वित्त मंत्री अरूण जेटली के इस बार के बजट से आरएसएस से जुड़े मजदूर सगंठन खुश नहीं है। और वह इस बजट को निराशाजन बताते हुए आज देशव्यापी प्रदर्शन का एलान किया है। भारतीय मज़दूर संघ का कहना है कि बजट में मज़दूरों और नौकरीपेशा वर्ग का बिल्कुल भी ध्यान नहीम रखा गया हैं। मजदूर संघ का यह भी कहना है कि इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किए गए और न मजदूरो के हित में कोई बड़ी घोषणा की गई। वही दूसरी ओर मिडिल क्लास लोग भी इस बजट से खुश नहीं है।

सरकार ने किसानों को रबी के बाद अब खरीफ फ़सलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का डेढ गुना पैसा देने का एलान किया है। किसानों को कर्ज के लिए 11लाख करोड़ का फ़ंड बनाने की बात कही है। लेकिन किसान इन सब योजना से खुश नहीं नजर आ रहे।

मिडिल क्लास और नौकरी पेशा वर्ग कोई खास रियायत नहीं दी। बता दें कि 2.5 लाख के इनकम टैक्स के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। और तो और स्वास्थ्य और शिक्षा सेस को 3% से 4 % कर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डाला गया। लेकिन इसी के साथ 40000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन देकर थोड़ी राहत जरूर दी गई है।